अपने कद से कहीं ऊंची सोच का धनी है रामकिशोर




अपने कद से कहीं ऊंची सोच का धनी है रामकिशोर


नागौर नाम रामकिशोर...उम्र 38 साल...कद 52 अंगुल...शिक्षा 8 वीं पास...काम खेतीबाड़ी। नागौर शहर के पास स्थित कसनाऊ गांव के रामकिशोर देखने पर ही भले ही वह किसी को अजीब सा लगे लेकिन व अपने कद से कहीं ऊंची सोच का धनी है। कुदरत के कहर ने उसे लंबा नहीं होने दिया, जन्म के साथ ही अपंगता का अभिशाप भी मिल गया लेकिन जोश व उत्साह से लबरेज रामकिशोर ने किसी से मदद लेने की बजाय अपने पैरों पर खड़े होने की सोची। यही वजह रही कि नागौर में शुक्रवार को आयोजित रोजगार मेले में वह किसी नौकरी की तलाश में नहीं, बल्कि ऋण लेने आया था ताकि अपना खुद का रोजगार खड़ा कर सके।

शारीरिक विकास न होने से रामकिशोर की लंबाई तो न बढ़ सकी लेकिन उसका जज्बा कोई कम नहीं कर पाया। इसलिए उसने जीवन में कुछ अलग करने की ठान ली। यही सोच उसे नागौर के पशु प्रदर्शनी स्थल पर लगे रोजगार मेले में खींच लाई। यहां उसने 8वीं पास बेरोजगारों के लिए निर्धारित स्कीम में लोन के लिए एप्लाई किया। उसने एक लाख रुपए का ऋण चाहा है। आगे बढऩे की उम्मीद लेकर आए रामकिशोर को मेले में हर कोई अचंभे से देख रहा था।
कुदरत के कहर को दिया जवाब

अविवाहित रामकिशोर को देखकर एक बारगी लगता है कि वह कैसे कोई मेहनत का काम कर पाएगा। लेकिन पैरों से अपाहिज रामकिशोर खेती बाड़ी में अपने बड़े भाई के साथ हाथ बंटाता है। खेत में ट्यूबवैल आदि के काम करते समय रामकिशोर को थकान महसूस नहीं होती। उसके भाई रामरतन बताते हैं कि रामकिशोर ने शारीरिक कमी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। जोश व जज्बे ने उसे हर समय कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया। अपनी आजीविका के लिए रामकिशोर लोन लेकर गांव में ही दुकान खोलना चाहता है। गांव व घर में सभी लोग उसे बहुत प्यार करते हैं।


सरकार से नहीं मिली मदद

रामकिशोर को पैरों से विकलांग होने के बावजूद सरकार से कोई सहायता नहीं मिली। पीछे मुड़कर नहीं देखने वाले रामकिशोर ने विषम परिस्थितियों के बावजूद 8वीं तक पढ़ाई की। आज रामकिशोर खेतीबाड़ी में हाथ बंटा कर अपने परिवार का अहम हिस्सा बन गया है।

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