बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

बॉर्डर पर बनेंगे जवानों के लिए नये सुरक्षा आसरे


बॉर्डर पर बनेंगे जवानों के लिए नये सुरक्षा आसरे


बाड़मेर सर्द हवाओं में सरहद की सुरक्षा में तैनात जवानों के लिए तारबंदी के पास नये सुरक्षा आसरे बनाए जाएंगे। इसे लेकर जल्द ही सीमा सुरक्षा बल के डीआईजी माधोसिंह चौहान एक प्रस्ताव बना कर जिला प्रशासन को भेजेंगे।

प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो जवानों के लिए नये आसरे तैयार होने का काम शुरू हो जाएगा।ऑपरेशन सर्द हवा के दौरान रण कच्छ क्षेत्र में सीमा के करीब डेरा डाले बीएसएफ के डीआईजी माधोसिंह चौहान, द्वितीय कमान अधिकारी परमिंदरसिंह सहित अन्य अफसर इन दिनो जवानों की रात्रि गश्त, पेट्रोलिंग और अन्य गतिविधियों पर नजर रखे हुए है।

डीआईजी ने बताया कि इन दिनों पड़ रही ठंड और कोहरे में सीमा पर सुरक्षा एक चुनौती है जिसे जवान मुश्तैदी से निभा रहे है। ऑपरेशन सर्द हवा के दौरान इसे महसूस किया जा रहा है कि एक से दूसरी बीओपी(बॉर्डर ऑपरेशन पोस्ट) के बीच तीन किमी का फासला है। ऐसे में यदि इस दूरी के बीच जवानों के लिए कुछ नये आसरे बीएडीपी के तहत बना दिए जाए तो जवानों को राहत मिलेगी।

आसरे बने तो होगा फायदा

गश्त के दौरान तारबंदी के करीब दुश्मनों की ओर से किए गए वार से बचाव के लिए फिलहाल कोई स्थान नहीं है। गश्त के दौरान एक पोस्ट से दूसरी पोस्ट के बीच तीन किमी का फासला कई बार परेशानियों का सबब बनता है। इतना ही नहीं इतनी लंबी दूरी को कवर करने में भी वक्त लगता है। ऐसे में डीआईजी की ओर से जवानों के लिए नये आसरे बनाने का प्रस्ताव बनाया जा रहा है। यदि यह बनते है तो जवानों को सर्दी,गर्मी, बरसात में जहां छत मिलेगी वहीं इन आसरों की डिजाइन दुश्मनों के सीधे वार से बचाव में मददगार होगी।


जवानों के लिए हर पल तैयार


इस बारे में कलेक्टर डा. वीणा प्रधान का कहना है कि जैसे ही बीएसएफ की ओर से ऐसा प्रस्ताव आएगा उसे लेकर हर संभव मदद की जाएगी। बीएडीपी के अलावा अन्य किसी मद से भी जवानों के लिए प्रशासन जितनी हो सकेगा उतनी मदद करने को तैयार है।




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