चार बड़े अधिकारियों के खिलाफ परिवाद
बाड़मेर । बाड़मेर जिले में शिव तहसील के साजीतड़ा गांव में 25 नवम्बर को हुए चिंकारा शिकार प्रकरण में आरोपी पांच सैनिकों सहित चार सैन्य अधिकारियों के खिलाफ वन विभाग ने गुरूवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बाड़मेर के समक्ष इस्तगासा दाखिल किया है। इस प्रकरण में सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट कनिष्ठ खण्ड बाड़मेर में दाखिल प्रार्थना खारिज कर दिया गया था।
वन विभाग ने चिंकारा शिकार प्रकरण में 88 आम्र्ड यूनिट वर्कशाप यूनिट प्रभारी अधिकारी लेफ्टिनेट कर्नल बी एस चंदेल, मेजर एके धारीवाल और कमांडिंग ऑफिसर अतुल्य बामजई एवं कर्नल गौतम-डे सहित सूबेदार गोपीलाल, हवलदार बी आर नाथ, नायक एन सरकार, लांस नायक आईआर परदेसी एवं सिपाही डीआर नायडू को आरोपी बनाया है। उपवन संरक्षक बीआर भादू ने बताया कि सेना के चार अधिकारियों सहित सभी नौ आरोपियों के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया गया। सुनवाई शनिवार को रखी गई है।
इस्तगासे में ही आरोप स्वीकार्य
वन विभाग का कहना है कि सेना की ओर से सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट कनिष्ठ खण्ड बाड़मेर में दाखिल इस्तगासे में मेजर एके धारीवाल के हस्ताक्षर से पेश प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि तीन चिंकारों का मांस सुखसिंह नामक व्यक्ति ने सैनिकों को दिया था। सेना के यूनिट में तो केवल चिंकारों की साफ-सफाई की गई थी। सेना के वरिष्ठ अधिकारी के न्यायालय में पेश किए गए लिखित बयान से ही यह बात साबित हो जाती है कि वनविभाग की ओर से बरामद मांस चिंकारे का ही था।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियमों के तहत राज्य पशु चिंकारे का मांस अथवा उसके शरीर के अवशेष्ा पास में रखना ही अपने आप में वन्यजीव अपराध है। सेना के इस्तगासे में स्वीकार्य बयान के साथ एफएसएल रिपोर्ट में भी सेना की जिप्सी में मिले रक्त के धब्बे चिंकारे के होने की पुष्टि हो चुकी है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सैन्य अधिकारी बार-बार कह रहे है कि शिकार तो सुखसिंह नाम के ग्रामीण ने किया है तो एक सिविलियन की ओर किए गए वन्यजीव अपराध की जांच सेना को करने का अधिकार कैसे संभव है।
बाड़मेर । बाड़मेर जिले में शिव तहसील के साजीतड़ा गांव में 25 नवम्बर को हुए चिंकारा शिकार प्रकरण में आरोपी पांच सैनिकों सहित चार सैन्य अधिकारियों के खिलाफ वन विभाग ने गुरूवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बाड़मेर के समक्ष इस्तगासा दाखिल किया है। इस प्रकरण में सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट कनिष्ठ खण्ड बाड़मेर में दाखिल प्रार्थना खारिज कर दिया गया था।
वन विभाग ने चिंकारा शिकार प्रकरण में 88 आम्र्ड यूनिट वर्कशाप यूनिट प्रभारी अधिकारी लेफ्टिनेट कर्नल बी एस चंदेल, मेजर एके धारीवाल और कमांडिंग ऑफिसर अतुल्य बामजई एवं कर्नल गौतम-डे सहित सूबेदार गोपीलाल, हवलदार बी आर नाथ, नायक एन सरकार, लांस नायक आईआर परदेसी एवं सिपाही डीआर नायडू को आरोपी बनाया है। उपवन संरक्षक बीआर भादू ने बताया कि सेना के चार अधिकारियों सहित सभी नौ आरोपियों के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया गया। सुनवाई शनिवार को रखी गई है।
इस्तगासे में ही आरोप स्वीकार्य
वन विभाग का कहना है कि सेना की ओर से सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट कनिष्ठ खण्ड बाड़मेर में दाखिल इस्तगासे में मेजर एके धारीवाल के हस्ताक्षर से पेश प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि तीन चिंकारों का मांस सुखसिंह नामक व्यक्ति ने सैनिकों को दिया था। सेना के यूनिट में तो केवल चिंकारों की साफ-सफाई की गई थी। सेना के वरिष्ठ अधिकारी के न्यायालय में पेश किए गए लिखित बयान से ही यह बात साबित हो जाती है कि वनविभाग की ओर से बरामद मांस चिंकारे का ही था।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियमों के तहत राज्य पशु चिंकारे का मांस अथवा उसके शरीर के अवशेष्ा पास में रखना ही अपने आप में वन्यजीव अपराध है। सेना के इस्तगासे में स्वीकार्य बयान के साथ एफएसएल रिपोर्ट में भी सेना की जिप्सी में मिले रक्त के धब्बे चिंकारे के होने की पुष्टि हो चुकी है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सैन्य अधिकारी बार-बार कह रहे है कि शिकार तो सुखसिंह नाम के ग्रामीण ने किया है तो एक सिविलियन की ओर किए गए वन्यजीव अपराध की जांच सेना को करने का अधिकार कैसे संभव है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें