अन्‍ना के आगे फिर झुकी सरकार?


नई दिल्ली. सरकार ने लोकपाल कानून का खाका करीब-करीब तैयार कर लिया है। शुक्रवार देर रात कांग्रेस के तीन नेता केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के निवास पर उनसे मिलने पहुंचे। इन नेताओं में पार्टी के लोकसभा में मुख्य सचेतक संदीप दीक्षित, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री नारायणसामी और संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल शामिल रहे।

माना जा रहा है कि इस बैठक में प्रस्तावित लोकपाल कानून की बारीकियों पर चर्चा की गई। सूत्रों के हवाले से जो खबरें आ रही हैं उनके मुताबिक सरकार प्रस्तावित लोकपाल कानून में कुछ शर्तों के साथ प्रधानमंत्री, ग्रुप सी के कर्मचारियों को लाने को तैयार है। इसके अलावा जिन मामलों में लोकपाल चाहेगा उसमें सीबीआई सीधे लोकपाल को रिपोर्ट करेगी।

सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक सिटिजन चार्टर के लिए सरकार अलग से कानून लाएगी। सरकार के प्रस्तावित लोकपाल कानून में लोकपाल को हटाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास रहेगा। टीम अन्ना की मांग रही है कि लोकपाल को हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया अपनाई जाए। प्रस्तावित लोकपाल कानून में अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़ी जातियों के लिए कानून के मुताबिक आरक्षण भी दिया जाएगा।

साफ है कि टीम अन्ना के ड्राफ्ट से सरकार के ड्राफ्ट में तीन अहम फर्क हैं। इसमें सीबीआई, न्यायपालिका और सिटिजन चार्टर का मुद्दा शामिल है। सरकार के ड्राफ्ट में टीम अन्ना की इन तीन अहम मांगों को बाहर रखा गया है। सरकार प्रस्तावित विधेयक को 20 दिसंबर को संसद में पेश करेगी।

संसदीय कार्य मंत्री हरीश रावत के मुताबिक संसद का सत्र 22 दिसंबर तक होने की वजह से सरकार ने सत्र को जनवरी तक बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इसके लिए सरकार की कोशिश होगी कि अन्य दलों को भी सत्र की अवधि बढ़ाए जाने पर भरोसे में लिया जाए। प्रधानमंत्री के रूस के दौरे से लौटने के बाद सरकार इस प्रस्ताव को रविवार को होने वाली कैबिनेट की विशेष बैठक में पेश कर सकती है।

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