उदयपुरदिसंबर 1971 में हुई भारत-पाक जंग में हमारी जीत के गवाह बने उदयपुर के मेजर सुजीत कुमार पंचोली का गुरुवार को निधन हो गया। 63 वर्षीय मेजर एक साल से ब्रेन कैंसर से जंग लड़ रहे थे। संयोग देखिए कि भारत विजय दिवस (16 दिसंबर) की पूर्व संध्या पर यह मेजर कैंसर से जिंदगी की जंग हार गया। पंचोली का शहर के निजी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। फतहसागर के समीप पीपी सिंघल मार्ग पर रहने वाले उनके परिवार में पत्नी नलिनी, दो बेटियां उमा व भाग्यश्री हैं। अंतिम संस्कार शुक्रवार सुबह 9.30 बजे महाकाल के समीप स्थित मोक्षधाम पर होगा। उल्लेखनीय है कि उस ऐतिहासिक जंग में 16 दिसंबर को भारत की जीत घोषित होने के साथ ही पाकिस्तान से बांग्लादेश का विभाजन भी हो गया था।
दो बार लड़ी थी जिंदगी की जंग1971 के युद्ध के दौरान हथगोला फटने से जख्मी हुए मेजर सुजीत कुमार पंचोली को तीन साल तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। पंचोली ने ये जंग जीत ली थी। इसके बाद उनकी तीसरी जंग कैंसर के साथ शुरू हो गई थी। करीब एक साल से ब्रेन कैंसर से उनकी जंग जारी थी। इसमें उनके परिवार दो बेटियां और पत्नी का पूरा साथ था।
दुश्मनों के बंकर में किया था कब्जा
देशभक्ति के जज्बे के चलते उदयपुर के सुजीत कुमार पंचोली 1966 में सेना में शामिल हुए थे। मेजर सुजीत कुमार पंचोली ने 1971 के युद्ध में जौहर दिखाया था। भीषण हमले के बीच उन्होंने पाक सीमा में घुसकर दुश्मनों के बंकर पर कब्जा कर लिया था। उस समय हथगोला फटने से वे बुरी तरह जख्मी हो गए थे।
दो बार लड़ी थी जिंदगी की जंग1971 के युद्ध के दौरान हथगोला फटने से जख्मी हुए मेजर सुजीत कुमार पंचोली को तीन साल तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। पंचोली ने ये जंग जीत ली थी। इसके बाद उनकी तीसरी जंग कैंसर के साथ शुरू हो गई थी। करीब एक साल से ब्रेन कैंसर से उनकी जंग जारी थी। इसमें उनके परिवार दो बेटियां और पत्नी का पूरा साथ था।
दुश्मनों के बंकर में किया था कब्जा
देशभक्ति के जज्बे के चलते उदयपुर के सुजीत कुमार पंचोली 1966 में सेना में शामिल हुए थे। मेजर सुजीत कुमार पंचोली ने 1971 के युद्ध में जौहर दिखाया था। भीषण हमले के बीच उन्होंने पाक सीमा में घुसकर दुश्मनों के बंकर पर कब्जा कर लिया था। उस समय हथगोला फटने से वे बुरी तरह जख्मी हो गए थे।
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