अस्पतालों में पटरी से उतरी व्यवस्थाएं

बाड़मेर डॉक्टरों की हड़ताल के दूसरे दिन जिले के अस्पतालों में हालात पहले दिन से भी ज्यादा खराब हो गए। राजकीय अस्पताल में सर्जन के नहीं होने से ऑपरेशन नहीं हो सके। डिलेवरी के मात्र तीन केसेज आए जबकि रोजाना औसत पंद्रह आते हैं। परिजनों ने मरीजों को डिस्चार्ज करा घर या निजी अस्पतालों का रुख किया। सिवाना में समय पर उपचार नहीं मिलने से दुर्घटना में घायल युवक की मौत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर जगहों पर अस्पताल कंपाडंडरों के भरोसे रहा। वहीं बुधवार को जिन हड़ताली डॉक्टरों ने पुलिस के पकडऩे के बाद रेस्मा के भय से ड्यूटी ज्वॉइन कर ली थी उनमें से तीन गुरुवार को अस्पताल नहीं आए।हड़ताल के बाद से भूमिगत हुए डॉक्टरों की तलाश गुरुवार को भी पुलिस ने की लेकिन कोई पकड़ में नहीं आया।
छुट्टियां रद्द, ड्यूटी पर आने की चेतावनी: कलेक्टर डॉ.वीणा प्रधान ने जिले में सेवारत डॉक्टरों के अवकाश निरस्त कर ड्यूटी पर उपस्थित होने के लिए निर्देश दिए। डॉ. प्रधान ने बताया कि जो डॉक्टर बुधवार से अनुपस्थित है या अवकाश पर है उनको तुरंत ड्यूटी पर उपस्थित होने के लिए कहा गया है। जो डॉक्टर ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होते है तो उनके खिलाफ राजस्थान सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि चिकित्सा सुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए बेरोजगार डॉक्टरों को प्रतिदिन 700 रुपए मानदेय पर लिया जा रहा है। जो भी डॉक्टर सेवाएं देना चाहते हैं वह तुरंत कार्यालय में संपर्क करें।
साथ ही सेवानिवृत्त डॉक्टर आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं देना चाहते हैं तो वह तुरंत जिला अस्पताल या उपखंड अस्पताल पर सेवाएं प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की हड़ताल तक जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत निजी अस्पताल के सत्यापित डिस्चार्ज के टिकट के आधार पर प्रसूताओं को देय राशि राजकीय अस्पताल संस्थान के अधिकृत अधिकारी की ओर से प्रदान की जाएगी। साथ ही निजी अस्पतालों से लिखी गई जेनरिक दवाइयां राजकीय अस्पताल के मुफ्त दवा वितरण केंद्रों से मुफ्त उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने गुरुवार शाम चिकित्सा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। बाड़मेर व बालोतरा में वैकल्पिक व्यवस्थाओं के निर्देश दिए। बाड़मेर केयर्न व राजवेस्ट के सहयोग से डॉक्टर लगाने के निर्देश दिए है। साथ विशेषज्ञ व सेवानिवृत्त डॉक्टरों को सेवा में लेने की हिदायत दी है।
नहीं मिले डॉक्टर: पुलिस गुरुवार सुबह से ही राजकीय अस्पताल के हड़ताल पर गए डॉक्टरों की तलाश में जुट गई। लेकिन रात साढ़े दस बजे तक एक भी डॉक्टर पुलिस के हाथ नहीं लगा। बुधवार को पुलिस ने जिन डॉक्टरों को पकड़ा था उनमें से तीन नहीं आए। वहीं सेना और केयर्न के चिकित्सक भी नहीं आए। बीएसएफ के एक व सेवानिवृत्त 1, तथा आयुर्वेद के पांच चिकित्सकों के साथ ही पीएमओ सहित चार डॉक्टरों ने अस्पताल की व्यवस्था संभाली।
ओपीडी में आई कमी: राजकीय अस्पताल की जहां रोजाना औसत ओपीडी एक हजार आती थी वहीं गुरुवार को 553 रही। वहीं निजी अस्पताल की ओपीडी में बढ़ोतरी हुई है। निजी अस्पतालों में डॉक्टर जहां दो बजे चले जाते थे वहीं शाम चार बजे तक मरीजों को देखते मिले।
फार्मासिस्ट धूप लेते रहे: राजकीय अस्पताल के मुफ्त दवा काउंटर पर लगे फार्मासिस्ट मरीजों में आई कमी के कारण धूप लेते रहे। अस्पताल की ओपीडी में आई कमी के कारण मुफ्त दवा काउंटर पर दिनभर शांति रही।
कहां क्या रहे हालात: सिणधरी. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत तीनों डॉक्टर सहित चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जो मरीज सीएचसी और पीएचसी पर आ रहे थे उन्हें नर्सिंग स्टॉफ की ओर से उपचार दिया जा रहा था।
गुड़ामालानी. डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के कारण एक आयुर्वेदिक डॉक्टर को लगाया गया। आस-पास के गांवों से आ रहे मरीज डॉक्टरों के अभाव में मजबूरन नीम हकीमों से उपचार करा रहे है। अस्पताल में ज्यादातर उपचार के लिए बच्चे आ रहे हैं लेकिन डॉक्टर के अभाव में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिव. सीएचसी में डॉक्टरों के बिना मरीजों को उपचार दिया गया। जहां अस्पताल में रोजाना एवरेज 100 मरीज आया करते थे वहीं आज 40 ओपीडी रहीं। यहां कंपाउंडर उपचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि कंपाउंडरों को दवा लिखना बैंड है लेकिन डॉक्टर नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरन दवा लिखनी पड़ रही है।
बाड़मेर. यूथ कांग्रेस के लोकसभा क्षेत्र के अध्यक्ष डॉ. रमन चौधरी अस्पतालों में मरीजों की दशा की खबरें पढ़ खुद को रोक नहीं पाए। गुरुवार सुबह वे राजकीय अस्पताल पहुंच गए और आउटडोर में मरीजों को देखा।डॉ. रमन बायतु विधायक कर्नल सोना राम चौधरी के बेटे हैं। वे न्यूयार्क से एमबीबीएस करने के बाद एम्स में डॉक्टर रह चुके हैं। बायतु पीएचसी पर भी वे सेवाएं दे चुके हैं।
बाड़मेर डॉक्टरों की हड़ताल के दूसरे दिन जिले के अस्पतालों में हालात पहले दिन से भी ज्यादा खराब हो गए। राजकीय अस्पताल में सर्जन के नहीं होने से ऑपरेशन नहीं हो सके। डिलेवरी के मात्र तीन केसेज आए जबकि रोजाना औसत पंद्रह आते हैं। परिजनों ने मरीजों को डिस्चार्ज करा घर या निजी अस्पतालों का रुख किया। सिवाना में समय पर उपचार नहीं मिलने से दुर्घटना में घायल युवक की मौत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर जगहों पर अस्पताल कंपाडंडरों के भरोसे रहा। वहीं बुधवार को जिन हड़ताली डॉक्टरों ने पुलिस के पकडऩे के बाद रेस्मा के भय से ड्यूटी ज्वॉइन कर ली थी उनमें से तीन गुरुवार को अस्पताल नहीं आए।हड़ताल के बाद से भूमिगत हुए डॉक्टरों की तलाश गुरुवार को भी पुलिस ने की लेकिन कोई पकड़ में नहीं आया।
छुट्टियां रद्द, ड्यूटी पर आने की चेतावनी: कलेक्टर डॉ.वीणा प्रधान ने जिले में सेवारत डॉक्टरों के अवकाश निरस्त कर ड्यूटी पर उपस्थित होने के लिए निर्देश दिए। डॉ. प्रधान ने बताया कि जो डॉक्टर बुधवार से अनुपस्थित है या अवकाश पर है उनको तुरंत ड्यूटी पर उपस्थित होने के लिए कहा गया है। जो डॉक्टर ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होते है तो उनके खिलाफ राजस्थान सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि चिकित्सा सुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए बेरोजगार डॉक्टरों को प्रतिदिन 700 रुपए मानदेय पर लिया जा रहा है। जो भी डॉक्टर सेवाएं देना चाहते हैं वह तुरंत कार्यालय में संपर्क करें।
साथ ही सेवानिवृत्त डॉक्टर आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं देना चाहते हैं तो वह तुरंत जिला अस्पताल या उपखंड अस्पताल पर सेवाएं प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की हड़ताल तक जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत निजी अस्पताल के सत्यापित डिस्चार्ज के टिकट के आधार पर प्रसूताओं को देय राशि राजकीय अस्पताल संस्थान के अधिकृत अधिकारी की ओर से प्रदान की जाएगी। साथ ही निजी अस्पतालों से लिखी गई जेनरिक दवाइयां राजकीय अस्पताल के मुफ्त दवा वितरण केंद्रों से मुफ्त उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने गुरुवार शाम चिकित्सा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। बाड़मेर व बालोतरा में वैकल्पिक व्यवस्थाओं के निर्देश दिए। बाड़मेर केयर्न व राजवेस्ट के सहयोग से डॉक्टर लगाने के निर्देश दिए है। साथ विशेषज्ञ व सेवानिवृत्त डॉक्टरों को सेवा में लेने की हिदायत दी है।
नहीं मिले डॉक्टर: पुलिस गुरुवार सुबह से ही राजकीय अस्पताल के हड़ताल पर गए डॉक्टरों की तलाश में जुट गई। लेकिन रात साढ़े दस बजे तक एक भी डॉक्टर पुलिस के हाथ नहीं लगा। बुधवार को पुलिस ने जिन डॉक्टरों को पकड़ा था उनमें से तीन नहीं आए। वहीं सेना और केयर्न के चिकित्सक भी नहीं आए। बीएसएफ के एक व सेवानिवृत्त 1, तथा आयुर्वेद के पांच चिकित्सकों के साथ ही पीएमओ सहित चार डॉक्टरों ने अस्पताल की व्यवस्था संभाली।
ओपीडी में आई कमी: राजकीय अस्पताल की जहां रोजाना औसत ओपीडी एक हजार आती थी वहीं गुरुवार को 553 रही। वहीं निजी अस्पताल की ओपीडी में बढ़ोतरी हुई है। निजी अस्पतालों में डॉक्टर जहां दो बजे चले जाते थे वहीं शाम चार बजे तक मरीजों को देखते मिले।
फार्मासिस्ट धूप लेते रहे: राजकीय अस्पताल के मुफ्त दवा काउंटर पर लगे फार्मासिस्ट मरीजों में आई कमी के कारण धूप लेते रहे। अस्पताल की ओपीडी में आई कमी के कारण मुफ्त दवा काउंटर पर दिनभर शांति रही।
कहां क्या रहे हालात: सिणधरी. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत तीनों डॉक्टर सहित चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जो मरीज सीएचसी और पीएचसी पर आ रहे थे उन्हें नर्सिंग स्टॉफ की ओर से उपचार दिया जा रहा था।
गुड़ामालानी. डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के कारण एक आयुर्वेदिक डॉक्टर को लगाया गया। आस-पास के गांवों से आ रहे मरीज डॉक्टरों के अभाव में मजबूरन नीम हकीमों से उपचार करा रहे है। अस्पताल में ज्यादातर उपचार के लिए बच्चे आ रहे हैं लेकिन डॉक्टर के अभाव में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिव. सीएचसी में डॉक्टरों के बिना मरीजों को उपचार दिया गया। जहां अस्पताल में रोजाना एवरेज 100 मरीज आया करते थे वहीं आज 40 ओपीडी रहीं। यहां कंपाउंडर उपचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि कंपाउंडरों को दवा लिखना बैंड है लेकिन डॉक्टर नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरन दवा लिखनी पड़ रही है।
बाड़मेर. यूथ कांग्रेस के लोकसभा क्षेत्र के अध्यक्ष डॉ. रमन चौधरी अस्पतालों में मरीजों की दशा की खबरें पढ़ खुद को रोक नहीं पाए। गुरुवार सुबह वे राजकीय अस्पताल पहुंच गए और आउटडोर में मरीजों को देखा।डॉ. रमन बायतु विधायक कर्नल सोना राम चौधरी के बेटे हैं। वे न्यूयार्क से एमबीबीएस करने के बाद एम्स में डॉक्टर रह चुके हैं। बायतु पीएचसी पर भी वे सेवाएं दे चुके हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें