24 दिसंबर 2011, शनिवार को एक श्रेष्ठ योग बना रहा है- शनिश्चरी अमावस्या। शास्त्रों के अनुसार जब शनिवार को अमावस्या रहती है तो उसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता हैं। इस योग को शनि दोष दूर करने के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
शनि को मनाने के लिए यह दिन काफी शुभ माना जाता है। इस दिन शनि के निमित्त किए गए उपाय से कुंडली के शनि दोष शांत होते हैं और परेशानियां समाप्त होती है। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद शनि की वस्तुओं का दान करना चाहिए।
ज्योतिष के अनुसार जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ फल देने वाला हो या जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो उन सभी के लिए यह योग खास फल देने वाला है। अत: इस दिन शनि दोष को दूर करने के लिए ज्योतिषीय उपाय अवश्य करने चाहिए।
24 दिसंबर, शनिश्चरी अमावस्या के दिन लोहे की कटोरी में तेल भरें, इसके बाद उसमें अपना चेहरा देखें। इसके बाद इस तेल को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान में दे दें। यह उपाय इस अमावस्या से शुरू करके प्रति शनिवार करना चाहिए। ऐसा करने से शनिदेव जल्दी प्रसन्न होते हैं।
पिछले माह नवंबर की 15 तारिख से शनि राशि बदलकर कन्या से तुला में आ गया है। इस वजह से सभी कन्या, तुला एवं वृश्चिक राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती एवं कर्क तथा मीन राशि वालों को ढैय्या का सामना करना पड़ रहा है। इन सभी लोगों को शनिश्चरी अमावस पर शनि के निमित्त दान-पुण्य और पूजा अवश्य करनी चाहिए।
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