भूख लगने पर रोती और प्यास लगने पर बिलखती है लक्ष्मी
बायतु चिमन जी के गांव बांगड़वों की ढाणी में मगाराम जाट के घर तेरह वर्ष पूर्व लक्ष्मी ने जन्म लिया। लक्ष्मी को उसकी छोटी बहन दमी को खिलाने में खूब मजा आता।
भाई भोमाराम के साथ अक्सर खिलौना खेलने में व्यस्त रहने वाली लक्ष्मी को महज तीन वर्ष के बाद ही पोलियो ने जकड़ लिया। लक्ष्मी का इलाज करवाने के लिए पिता मगाराम व माता दौली देवी ने दिन-रात एक कर दिया। अपने कंधों पर लक्ष्मी को लिए बायतु, बाड़मेर सहित कई अस्पतालों की चौखट पर दस्तक दी और अपनी क्षमता के अनुरूप इलाज करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। समाजसेवी पदमाराम सहारण ने बताया कि लक्ष्मी बीपीएल परिवार से है और गरीब माता-पिता उसका इलाज करवाने में समर्थ नहीं। इस बीच लक्ष्मी अपना मानसिक संतुलन खोने लगी तो मजबूरन परिजनों ने उसे जाल के पेड़ से बांध दिया। पिछले दस वर्षों से लक्ष्मी न तो चल सकती है और न ही बोल सकती है। भूख लगने पर लक्ष्मी रोने लगती है और प्यास लगने पर बिलखती है। लक्ष्मी की मनोदशा को देख परिजन दस वर्षों से अपनी आंखों से आंसू बहाने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि लक्ष्मी को खुला छोड़ कर मजदूरी करने नहीं जा सकते। ऐसे में उसे बांधना हमारी मजबूरी हो गई है। लक्ष्मी के परिजन इसे पूर्व जन्म का बदला समझ अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। लक्ष्मी की माता दौली देवी ने बताया कि उनके पास इतना पैसा नहीं कि बड़े अस्पताल में लक्ष्मी का इलाज करवा सके। बायतु चिमन जी सरपंच बाली देवी ने बताया कि लक्ष्मी पिछले कई वर्षों से पेड़ से बंधी है। लोग कहते हैं कि उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। समाजसेवी चंद्रपाल राव ने बताया कि यदि कोई संस्था या व्यक्ति आगे आकर लक्ष्मी का इलाज करवाए तो वह भगवान से कम नहीं। लक्ष्मी का इलाज होने के साथ ही अगर यह सही हो जाए तो स्कूल जा सकेगी।
बायतु चिमन जी के गांव बांगड़वों की ढाणी में मगाराम जाट के घर तेरह वर्ष पूर्व लक्ष्मी ने जन्म लिया। लक्ष्मी को उसकी छोटी बहन दमी को खिलाने में खूब मजा आता।
भाई भोमाराम के साथ अक्सर खिलौना खेलने में व्यस्त रहने वाली लक्ष्मी को महज तीन वर्ष के बाद ही पोलियो ने जकड़ लिया। लक्ष्मी का इलाज करवाने के लिए पिता मगाराम व माता दौली देवी ने दिन-रात एक कर दिया। अपने कंधों पर लक्ष्मी को लिए बायतु, बाड़मेर सहित कई अस्पतालों की चौखट पर दस्तक दी और अपनी क्षमता के अनुरूप इलाज करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। समाजसेवी पदमाराम सहारण ने बताया कि लक्ष्मी बीपीएल परिवार से है और गरीब माता-पिता उसका इलाज करवाने में समर्थ नहीं। इस बीच लक्ष्मी अपना मानसिक संतुलन खोने लगी तो मजबूरन परिजनों ने उसे जाल के पेड़ से बांध दिया। पिछले दस वर्षों से लक्ष्मी न तो चल सकती है और न ही बोल सकती है। भूख लगने पर लक्ष्मी रोने लगती है और प्यास लगने पर बिलखती है। लक्ष्मी की मनोदशा को देख परिजन दस वर्षों से अपनी आंखों से आंसू बहाने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि लक्ष्मी को खुला छोड़ कर मजदूरी करने नहीं जा सकते। ऐसे में उसे बांधना हमारी मजबूरी हो गई है। लक्ष्मी के परिजन इसे पूर्व जन्म का बदला समझ अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। लक्ष्मी की माता दौली देवी ने बताया कि उनके पास इतना पैसा नहीं कि बड़े अस्पताल में लक्ष्मी का इलाज करवा सके। बायतु चिमन जी सरपंच बाली देवी ने बताया कि लक्ष्मी पिछले कई वर्षों से पेड़ से बंधी है। लोग कहते हैं कि उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। समाजसेवी चंद्रपाल राव ने बताया कि यदि कोई संस्था या व्यक्ति आगे आकर लक्ष्मी का इलाज करवाए तो वह भगवान से कम नहीं। लक्ष्मी का इलाज होने के साथ ही अगर यह सही हो जाए तो स्कूल जा सकेगी।

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