राजस्थानी शेर का कमाल

राजस्थानी शेर का कमाल

कोलकाता। "मंजिल उन्हें मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। सिर्फ पंख होने से क्या होता है, हौंसलों से उड़ान होती है।" राजस्थान के सवाई माधोपुर इलाके के मूल निवासी जांबाज आईपीएस अधिकारी मनोज वर्मा ने इसे सच साबित कर दिया। भारत के कई राज्यों में आतंक का पर्याय बने माओवादी किशनजी को वर्मा के नेतृत्व वाली काउंटर इंसरजेन्सी फोर्स (सीआईएफ) के जवानों ने कोबरा वाहिनी के साथ मिलकर मार गिराया।

वर्ष 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी वर्मा को13 फरवरी 2009 को पश्चिम बंगाल के सबसे अधिक माओवाद प्रभावित जिले पश्चिम मिदनापुर का एसपी बनाया गया था। उस समय जिले में माओवादियों के आतंक के चलते आईपीएस यहां पदभार संभालने के कतराते थे। राजस्थान के इस शेर ने सहर्ष यह जिम्मा संभाला। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने माओवादियों के छक्के छुड़ा दिए थे। वर्मा के नेतृत्व में शशधर महतो, सिद्घू सोरेन, लालमोहन टुडू जैसे कई माओवादी मार गिराए गए थे। 25 मार्च 2010 को किशनजी भी मुठभेड़ में जख्मी हुआ था।

वर्मा ने 12 नवम्बर 2011 को पदभार संभाला और एक पखवाड़े से भी कम समय में सरकार को किशनजी जैसे कुख्यात माओवादी का शव तोहफे में दे दिया।

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