जोधपुर .....देवताओं की साल व वीरों का दालान

देवताओं की साल व वीरों का दालान
भारत के राजस्थान प्रान्त में स्थितजोधपुर नगर के मंडोर बगीचे में स्थित एक दर्शनीय स्थल है। राजस्थानी भाषा में साल का अर्थ कक्ष और दालान का अर्थ बरामदा है। अजीत पोल से प्रवेश करते ही एक लम्बा बरामदा दिखाई पड़ता है इसे ही देवताओं की साल व वीरों का दालान कहा जाता है।इस बरामदे में विभिन्न देवताओं व विभिन्न स्थानीय वीरों की विशालकाय प्रतिमाओं का समूह बना है, सभी प्रतिमाएँ एक ही समूचीचट्टान में उत्कीर्ण की गई है जो जन समुदाय की पूजा अर्चना व श्रद्धा का केंद्र है। ये शिला पर उत्कीर्ण प्रतिमाएँ इस बात की परिचायिक हैं कि मारवाड़राज्य में कला की परम्परा १८वी. सदी में भी पर्याप्त विकसित अवस्था में विद्यमान थी। इस देवताओं की साल में वीरों का दालान का निर्माण कार्य जोधपुरके महाराजा अजीत सिंह जी (१७०७-१७२४) के शासन काल में हुआ था, जबकि देवताओं वाले संभाग का निर्माण उनके पुत्र महाराजा अभय सिंह जी (१७२४-१७८६) के शासन काल में पूर्ण हुआ था। इस शिलाखंड में उत्कीर्ण प्रत्येक मूर्ति लगभग १० फुट ऊँची है तथा चूने का प्लास्टर करके सजाई गई है। ये संख्या में १६ हैं, इसके साथ ही एक सुन्दर मंदिर तथा एक पानी की बावडी बनी हुई है।

देवताओ की साल में स्थित मूर्तियाँ इस प्रकार हैं -- चामुंडा जी की मूर्ति जो मंडोर के परिहार राजाओं की इष्ट देवी हैं, कंकाली जी की मूर्ति जो नर कंकालों की माला पहनने वाली देवी हैं, गुंसाई जी की मूर्ति जो बाड़मेर के प्रसिद्ध कृष्ण भक्त थे, मल्लिनाथ जी की मूर्ति जो मारवाड़ के प्रसिद्ध लोक देवता और मालानी राज्य के संस्थापक थे, पाबू जी जो राजस्थान के प्रसिद्ध लोक देवता हैं, जिन्होंने गायों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। बाबा रामदेव जो राजस्थान ही नहीं पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध लोक देवता और पीर जो तंवर वंशी राजपूत और पोकरण के शासक थे इनका प्रसिद्ध स्थान रामदेवरा पोकरण के पास है जहाँ सभी धर्मो के लोग मन्नत माँगने आते है। सितम्बर में रामदेवरा में बहुत बड़ा मेला लगता है जहाँ पैर रखने तक की जगह नहीं होती। हड्बू जी की मूर्ति ये भी मारवाड़ के लोकदेवताओं में गिने जाते है जो राव जोधा के समकालीन थे, जाम्भो जी की मूर्ति, ये लोक देवता बीकानेर के हरसुर गांव के निवासी पंवार राजपूत थे इन्होने ही पर्यावरण की रक्षा करने वाली विश्नोई जाति का धर्म चलाया था विश्नोई जाति के ये अराध्य देव हैं, मेहा जी की मूर्ति जो लोकदेवता हैं और मारवाड़ के ही इसरू गाँव के जागीरदार थे। गोगा जी की मूर्ति जो राजस्थान के पाँच पीरों में शामिल ये प्रसिद्ध लोकदेवता है जिनकी मान्यता देश में दूर-दूर तक फैली है। गोगा जी ई. सम्वत १२९६ में फिरोजशाह से युद्ध करते हुए देवलोक सिधारे थे।

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