जैसलमेर में अनूठी पहल
जेल में कैदियों को तालीम से जोड़ने के लिए साक्षरता कक्षा का संचालन शुरू
कोई नहीं रहेगा अंगूठा छाप
जैसलमेर, 23 नवंबर/अब जैसलमेर जेल से जो कैदी छूटकर बाहर निकलेंगे वे अंगूठा टेक नहीं होंगे। जेल में पहुंचने वाले निरक्षर अब साक्षर होकर जेल से बाहर निकलेंगे। यह सब संभव होगा जिला कलक्टर महावीरप्रसाद स्वामी की पहल पर जैसलमेर जिला प्रशासन और जिला जेल के मिले-जुले प्रयासों से। जैसलमेर जिला जेल में बुधवार को आयोजित समारोह में कैदियों को तालीम से जोड़ने और साक्षर तथा शिक्षित बनाने की अभिनव योजना का श्रीगणेश हुआ।
जेल के अँधेरे कोनों में रहने वाले कैदियों को ज्ञान की रोशनी बाँटने का सूत्रपात करने वाले इस आयोजन में जेल महानिरीक्षक ओमेन्द्र भारद्वाज ने सरस्वती की तस्वीर पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन से इस अभियान की शुरूआत की।
इस मौके पर जिला कलक्टर एम.पी. स्वामी, जिला पुलिस अधीक्षक श्रीमती ममता बिश्नोई, जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी एम.एल. बारूपाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गणपतलाल, पुलिस उपाधीक्षक बंशीलाल, जेल उप अधीक्षक अशोक उपाध्याय, सीआई वीरेन्द्रसिंह सहित जेल, प्रशासन एवं पुलिस अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित थे।
उच्चशिक्षित कैदियों ने उठाया साथियों को पढ़ाने का जिम्मा
जिला कारागृह में इन कैदियों के लिए रोजाना दिन में ग्यारह बजे से एक बजे तक साक्षरता कक्षाओं का संचालन होगा। इसके लिए कैदियों में से स्नातक स्तर तक पढ़े-लिखे दो कैदियों धारसिंह एवं शिवदान सिंह ने शेष साथियों को पढ़ाने-लिखाने का स्वैच्छिक बीड़ा उठाया है और ये दोनों ही कैदी बतौर स्वयंसेवक शिक्षक(वी.टी.) के रूप में अपने दायित्व निभाएंगे।
साक्षरता समिति ने लगाए प्रेेरक और कार्यक्रम अधिकारी
साक्षरता कक्षा के बेहतर संचालन के लिए जिला साक्षरता की ओर से प्रेरकों को पर्यवेक्षण के लिए लगाया गया है। इनमें अमरसागर के प्रेरक दीपचन्द तथा छत्रेल के प्रेरक कमलकुमार झमेरिया सात-सात दिनों के अन्तराल मेें पर्यवेक्षण करेंगे। जिला साक्षरता समिति के कार्यक्रम अधिकारी एवं संदर्भ व्यक्ति राजेेन्द्रसिंह भाटी जेल में साक्षरता कक्षा का संचालन करने वाले प्रेरकों एवं स्वयंसेवी शिक्षकों को कैदियों के मनोविज्ञान के अनुसार बेहतर तालीम के लिए मार्गदर्शन देंगे।
कैदियों के लिए साक्षरता समिति द्वारा सामग्री भेंट
जिला साक्षरता समिति की ओर से जेल में संचालित साक्षरता कक्षा के अनूठे विद्यार्थियों के लिए 25 साक्षरता किट दिए हैं। इनमें स्लेट, पेंसिल, रबर, शॉपनर, कॉपी, आखर हलचल आदि पढ़ाई-लिखाई के लिए उपयोगी सामग्री समाहित है। इस साक्षरता कक्षा में वर्तमान में 18 कैदियों को साक्षर एवं शिक्षित बनाया जाएगा।
समारोहपूर्वक हुई शुरूआत
जेल में साक्षरता कक्षा संचालन के शुभारंभ अवसर पर राजस्थान के महानिदेशक(जेल) ओमेन्द्र भारद्वाज के मुख्य आतिथ्य, जिला कलक्टर एम.पी. स्वामी की अध्यक्षता एवं जिला पुलिस अधीक्षक श्रीमती ममता बिश्नोई के विशिष्ट आतिथ्य में समारोह आयोजित किया गया। आरंभ में जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी मोहनलाल बारूपाल ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए जेल में साक्षरता कक्षा संचालन की पृष्ठभूमि तथा कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी।
अतिथियों का पुष्पहारों से स्वागत उपाधीक्षक -जेल अशोककुमार उपाध्याय, जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी एम.एल. बारूपाल, कार्यक्रम अधिकारी राजेन्द्र सिंह, कम्प्यूटर ऑपरेटर कंचन व्यास एवं रेखा शर्मा, भंवराराम आदि ने किया।
कैदी साक्षर होकर निकलेंगे बाहर
समारोह में मुख्य अतिथि महानिदेशक ओमेन्द्र भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश की जेलों में निरक्षर कैदियों को साक्षर बनाने के लिए प्रभावी प्रयासों का बीड़ा उठाया गया है और यह सोचा गया है कि जेल में बंद कैदी जब बाहर निकले तब साक्षर होकर निकले।
कैदियों को संबोधित करते हुए भारद्वाज ने कहा कि केवल नाम लिखना या हस्ताक्षर करना ही साक्षरता नहीं है बल्कि जीवन के लिए साक्षरता व्यापक अर्थ रखती है। साक्षरता और शिक्षा से ही नए जीवन के रास्ते खुल जाते हैं और जीवन व्यवहार तथा लोक व्यवहार की तालीम से ही जीवन संवरने लगता है।
नहीं पढ़ेंगे तो खुद पिछड़ते जाएंगे
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ पाने के लिए भी साक्षरता और शिक्षा बहुत जरूरी है। ऐसे में कैदियों के जीवन में नए रंग भरने के लिए तालीम का होना नितान्त जरूरी है। महानिदेशक ने कहा कि संतोषी जीवन को अपनाने वाले लोग भी यदि पढ़ने में रुचि नहीं रखते हैं तो वे जमाने की तेज रफ्तार को खो देंगे और अपने आप पिछड़ जाएंगे। पढ़ना और आगे बढ़ना हर व्यक्ति का पहला कर्त्तव्य होना चाहिए।
कैदियों का जीवन सँवरेगा
जिला कलक्टर एम.पी. स्वामी ने जैसलमेर जिला कारागृह में कैदियों को साक्षर करने के लिए कक्षा की शुरूआत को बेहतर पहल बताया और कहा कि साक्षरता और शिक्षा से कैदियों के जीवन व्यवहार में बदलाव आएगा और इसका लाभ समाज को मिलेगा।
शिक्षा से होता है समस्याओं का खात्मा
जिला पुलिस अधीक्षक श्रीमती ममता बिश्नोई ने शिक्षा और व्यक्तित्व विकास तथा सामाजिक तरक्की का मूलाधार बताया और कहा कि शिक्षा को अंगीकार कर लेने मात्र से जीवन की कई समस्याओं को स्वयमेव अन्त हो जाता है और व्यक्ति समाज के लिए जीने लगता है। उन्होंने कैदियों को शिक्षा के महत्त्व से परिचित कराया और कहा कि पूरे मन से शिक्षा पाएं तथा जीवन को निखारें।
नैतिक मूल्यों को आत्मसात करें
समारोह में उपाधीक्षक (जेल) अशोककुमार उपाध्याय ने सुरक्षा, विवेक, स्वच्छता और साक्षरता के महत्व के बारे में कैदियों को समझाते हुए कहा कि तन, मन एवं धन से समर्पण के लिए सेवा, ध्यान, दान आदि के साथ ही सत्संग और रचनात्मक प्रवृत्तियों को जरूरी बताया।
समारोह का संचालन करते हुए जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी मोहनलाल बारूपाल ने जिले में साक्षरता गतिविधियों के संचालन के बारे में विस्तार से जानकारी दी और शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन की रस्म जेल उपाधीक्षक अशोककुमार उपाध्याय ने अदा की।
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