ऐसी मान्यता है कि जब भैरव नामक राक्षस माता का पीछा कर रहा था तो उसे छकाने के लिए माता नौ महीने तक इसी संकीर्ण गुफा में छिपी रहीं। इसी कारण यह स्थान माता के विशेष मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया। ऐसी भी मान्यता है कि अर्धकुंवारी के दर्शन बिना माता का दर्शन अधूरा है। लगभग 15 फुट लंबी गुफा मे बसे इस पवित्र स्थल की यात्रा बेहद कठिन होती है।
ऐसी मान्यता है कि जब भैरव नामक राक्षस माता का पीछा कर रहा था तो उसे छकाने के लिए माता नौ महीने तक इसी संकीर्ण गुफा में छिपी रहीं। इसी कारण यह स्थान माता के विशेष मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया। ऐसी भी मान्यता है कि अर्धकुंवारी के दर्शन बिना माता का दर्शन अधूरा है। लगभग 15 फुट लंबी गुफा मे बसे इस पवित्र स्थल की यात्रा बेहद कठिन होती है।
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