जायदाद में फंसी मासूम वेहनी की किस्मत!
बाड़मेर। मासूम वेहनी अपने पिता के दुनिया से विदा होने के चौदह दिन बाद दुनिया में आई। बचपन की किलकारियां शब्दों की शृंखला में बदलती, उससे पहले मां भी पराई हो गई। मां से बिछड़ने के बाद उसे नानी की गोद नसीब हुई।
नानी की गोद में खेलते-खेलते वह स्कूल जाने लगी। स्कूल से आते समय अब से पच्चीस दिन पहले वह नानी से बिछड़कर दादी के पास पहुंच गई और स्कूल व नानी दोनों पीछे छूट गए। वेहनी के नाना का आरोप है कि जमीन जायदाद के लिए वेहनी का अपहरण किया गया।
सिणधरी थाना क्षेत्र के कोशलू गांव के रहने वाले बागाराम ने अपनी पुत्री धर्मी का विवाह करीब छह सात वर्ष पहले नेहरों की ढाणी निवासी खेताराम के साथ किया। विवाह के कुछ माह बाद धर्माराम की मृत्यु हो गई। खेताराम की मृत्यु के ठीक चौदह दिन बाद धर्मी ने एक बिटिया को जन्म दिया, जिसका नाम वेहनी रखा गया।
बागाराम ने धर्मी का विवाह कहीं और कर दिया और वेहनी को अपने पास रख लिया। वेहनी की नानी झीमोदेवी के अनुसार उसका जन्म ननिहाल में हुआ और उसने उसे पाल पोसकर बड़ा किया। स्कूल जाने लायक होने पर वेहनी को स्कूल में भर्ती करवाया। वह कोशलू स्थित एक निजी विद्यालय में कक्षा प्रथम में पढ़ती है।
संपत्ति का विवाद
सिणधरी थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार वेहनी के पिता स्व. खेताराम के संयुक्त खातेदारी खेत में स्वामित्व रखने देवाराम व जालाराम ने चौबीस सितम्बर को वेहनी का अपहरण कर लिया और नेहरों की ढाणी ले गए। नानी झीमो का आरोप है कि वे वेहनी का नाम पिता की खातेदारी जमीन से बेदखल करने के लिए ले गए हैं।
चूंकि वेहनी नाबालिग है और नानी का दावा है कि वह ही उसकी संरक्षक है। इसलिए वह उसके पास रहनी चाहिए। उधर वेहनी की दादी ने उस पर अपना हक जताते हुए सेशन न्यायालय बालोतरा में वाद दायर किया और वेहनी को अपने पास रख लिया है। इस तरह विद्यालय से बेदखल हुई यह मासूम बालिका दादी व नानी के बीच फंसकर रह गई है।
पुलिस कुछ नहीं कर सकती
वेहनी की नानी ने अपहरण का मामला दर्ज कराया है, लेकिन उसके संरक्षकत्व को लेकर दादी व नानी ने सेशन न्यायालय में वाद दायर कर रखा है। न्यायालय का निर्णय होने से पहले पुलिस कुछ नहीं कर सकती।
सुरेन्द्रसिंह थानाधिकारी, सिणधरी
स्कूल में पढ़ती थी
वेहनी के नाना बागाराम ने उसे हमारे स्कूल में भर्ती करवाया। उसका जन्म भी नाना के घर हुआ था। वह कक्षा प्रथम में पढ़ती है। पिछले पच्चीस दिन से विद्यालय नहीं आ रही है।
हरीश कालीराणा प्रधानाध्यापक श्री जय किसान शांति बाल निकेतन कोशलू
मेरी वेहनी को लौटा दो
वेहनी का जन्म मेरे घर हुआ। दादी ने उसने पालने पोसने से मना किया तो मैंने पाला पोसा। अब वह मेरी है। मुझे मेरी वेहनी को लौटा दो। मुझे मेरी बच्ची चाहिए।
झीमोदेवी (वेहनी की नानी)
बाड़मेर। मासूम वेहनी अपने पिता के दुनिया से विदा होने के चौदह दिन बाद दुनिया में आई। बचपन की किलकारियां शब्दों की शृंखला में बदलती, उससे पहले मां भी पराई हो गई। मां से बिछड़ने के बाद उसे नानी की गोद नसीब हुई।
नानी की गोद में खेलते-खेलते वह स्कूल जाने लगी। स्कूल से आते समय अब से पच्चीस दिन पहले वह नानी से बिछड़कर दादी के पास पहुंच गई और स्कूल व नानी दोनों पीछे छूट गए। वेहनी के नाना का आरोप है कि जमीन जायदाद के लिए वेहनी का अपहरण किया गया।
सिणधरी थाना क्षेत्र के कोशलू गांव के रहने वाले बागाराम ने अपनी पुत्री धर्मी का विवाह करीब छह सात वर्ष पहले नेहरों की ढाणी निवासी खेताराम के साथ किया। विवाह के कुछ माह बाद धर्माराम की मृत्यु हो गई। खेताराम की मृत्यु के ठीक चौदह दिन बाद धर्मी ने एक बिटिया को जन्म दिया, जिसका नाम वेहनी रखा गया।
बागाराम ने धर्मी का विवाह कहीं और कर दिया और वेहनी को अपने पास रख लिया। वेहनी की नानी झीमोदेवी के अनुसार उसका जन्म ननिहाल में हुआ और उसने उसे पाल पोसकर बड़ा किया। स्कूल जाने लायक होने पर वेहनी को स्कूल में भर्ती करवाया। वह कोशलू स्थित एक निजी विद्यालय में कक्षा प्रथम में पढ़ती है।
संपत्ति का विवाद
सिणधरी थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार वेहनी के पिता स्व. खेताराम के संयुक्त खातेदारी खेत में स्वामित्व रखने देवाराम व जालाराम ने चौबीस सितम्बर को वेहनी का अपहरण कर लिया और नेहरों की ढाणी ले गए। नानी झीमो का आरोप है कि वे वेहनी का नाम पिता की खातेदारी जमीन से बेदखल करने के लिए ले गए हैं।
चूंकि वेहनी नाबालिग है और नानी का दावा है कि वह ही उसकी संरक्षक है। इसलिए वह उसके पास रहनी चाहिए। उधर वेहनी की दादी ने उस पर अपना हक जताते हुए सेशन न्यायालय बालोतरा में वाद दायर किया और वेहनी को अपने पास रख लिया है। इस तरह विद्यालय से बेदखल हुई यह मासूम बालिका दादी व नानी के बीच फंसकर रह गई है।
पुलिस कुछ नहीं कर सकती
वेहनी की नानी ने अपहरण का मामला दर्ज कराया है, लेकिन उसके संरक्षकत्व को लेकर दादी व नानी ने सेशन न्यायालय में वाद दायर कर रखा है। न्यायालय का निर्णय होने से पहले पुलिस कुछ नहीं कर सकती।
सुरेन्द्रसिंह थानाधिकारी, सिणधरी
स्कूल में पढ़ती थी
वेहनी के नाना बागाराम ने उसे हमारे स्कूल में भर्ती करवाया। उसका जन्म भी नाना के घर हुआ था। वह कक्षा प्रथम में पढ़ती है। पिछले पच्चीस दिन से विद्यालय नहीं आ रही है।
हरीश कालीराणा प्रधानाध्यापक श्री जय किसान शांति बाल निकेतन कोशलू
मेरी वेहनी को लौटा दो
वेहनी का जन्म मेरे घर हुआ। दादी ने उसने पालने पोसने से मना किया तो मैंने पाला पोसा। अब वह मेरी है। मुझे मेरी वेहनी को लौटा दो। मुझे मेरी बच्ची चाहिए।
झीमोदेवी (वेहनी की नानी)

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