नई दिल्ली. अन्ना हजारे ने मजबूत लोकपाल विधेयक की मांग के साथ कांग्रेस के विरोध में अपनी प्रस्तावित ‘यात्रा’ को टाल दिया है। अब वे संसद के शीतकालीन सत्र के खत्म होने का इंतजार करेंगे। अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा- अन्ना अब कुछ नहीं बोलेंगे। शीतकालीन सत्र खत्म होने का इंतजार करेंगे। हम देखेंगे कि कांग्रेस विधेयक लाती है या नहीं। कांग्रेस यदि बिल नहीं लाती है तो हम लोगों से उन्हें वोट न देने की अपील करेंगे।
17 अक्टूबर को टीम अन्ना के सदस्य बुंदेलखंड के बांदा और कानपुर जाएंगे। इसके बाद अगले दिन वे उन्नाव और लखनऊ में होंगे। जब केजरीवाल से पूछा गया कि वे बसपा का विरोध क्यों नहीं कर रहे, उन्होंने कहा कि उसकी जरूरत ही नहीं है। यदि मायावती चाह भी लें तो भी मजबूत लोकपाल बिल नहीं ला सकतीं। लेकिन यदि सोनिया गांधी ने ऐसा ठान लिया तो दो मिनट में यह हो जाएगा। हमें सोनिया को डराने की जरूरत है, माया को नहीं।
सूत्रों के मुताबिक विलासराव देशमुख ने बुधवार को अन्ना हजारे को फोन कर उनसे यूपी की प्रस्तावित यात्रा टालने का आग्रह किया। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव ने अन्ना को बताया कि प्रधानमंत्री रोजाना के आधार पर लोकपाल बिल पर काम कर रहे हैं और यदि अन्ना अब भी यूपी की यात्रा पर निकल रहे हैं तो इससे लोगों में संशय पैदा होगा।
हिसार में टीम अन्ना के कांग्रेस विरोधी अभियान से पार्टी परेशान है। इस परेशानी से उबरने के लिए कांग्रेस ने पर्दे के पीछे से हर संभव कोशिश शुरू कर दी है। कांग्रेस की चिंता अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर है। मजबूत जनलोकपाल बिल पारित कराने पर अड़ी टीम अन्ना अगले चरण में अपने कांग्रेस विरोधी अभियान को उत्तर प्रदेश ले जाने वाली है। इसलिए कांग्रेस किसी भी तरह अन्ना को राह का रोड़ा बनने से रोकना चाहती है।
बताया जा रहा है कि अन्ना को पाले में करने के लिए कांग्रेस राष्ट्रपति पद का दांव तक खेलने के लिए तैयार है। हालांकि अन्ना ने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में लिखी चिट्ठी में साफ किया है कि वह कभी भी राजनीति में नहीं आएंगे और न ही देश का राष्ट्रपति बनने की इच्छा रखते हैं। अन्ना ने लिखा, 'राष्ट्रपति बनने के लिए न ही मैं योग्य हूं और न मेरी ऐसी कोई इच्छा है। मैं राष्ट्रपति बनकर देश और समाज के लिए वो नहीं कर पाउंगा जो अब कर पा रहा हूं।'
कांग्रेस व सरकार के मध्यस्थों ने अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण को किनारे कर अन्ना के पुराने सहयोगियों को शीशे में उतारने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसके लिए महाराष्ट्र के लॉबिस्ट अभिनंदन थोराट को भी लगाया गया है। वह चिंतनग्रुप नाम से इमेज मेकिंग एजेंसी चलाते हैं और विलासराव देशमुख के जनसंपर्क का काम देखते हैं। राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय महाराष्ट्र के कई बड़े नेताओं से भी थोराट के करीबी संबंध हैं।
अन्ना के निजी सहायक सुरेश पठारे और दादा पठारे व अनिल शर्मा जैसे हजारे के सबसे करीबी लोगों से भी इनके बेहद अच्छे संबंध हैं। बीते कुछ समय में वह कम से कम तीन बार अन्ना के साथ दो-ढाई घंटे तक बंद कमरे में बैठक कर चुके हैं।
हिसार लोकसभा उपचुनाव में हार की स्थिति में अन्ना हजारे से निपटने के लिए सरकार भी कई मोर्चों पर काम कर रही है। कांग्रेस अंदर ही अंदर यह बात मान रही है कि टीम अन्ना ने हिसार उपचुनाव में कांग्रेस के खिलाफ प्रचार कर पार्टी की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया है। अब सरकार के राजनीतिक सलाहकार टीम अन्ना से निपटने के लिए रणनीति बनाने में व्यस्त हैं। कांग्रेस की यह ताजा रणनीति संसद के शीतकालीन सत्र में दिखाई देगी। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अन्ना को चिट्ठी लिख कर यह संकेत दिया है। मनमोहन ने अन्ना की सभी मांगों पर सकारात्मक बातें कहीं हैं।
सरकार को मालूम है कि अन्ना हजारे ने कांग्रेस के विरोधियों को कोई सर्टिफिकेट नहीं दिया है और अगर हिसार में कांग्रेस की हार होती है तो गांधीवादी समाजसेवी अपनी जीत का दावा करेंगे। ऐसे में सरकार यह दलील जोरदार ढंग से आगे रख सकती है कि उनका एजेंडा सिर्फ लोकपाल कानून तक ही सिमटा हुआ नहीं है बल्कि इसमें बडे़ सरकारी सुधार जैसे चुनाव सुधार और सरकारी विभागों के लिए सिटिजन चार्टर जैसी चीजें शामिल हैं।
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