नई दिल्ली। राजधानी की एक सत्र अदालत ने दुष्कर्म को सिर्फ एक महिला के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ एक अपराध करार दिया है। अदालत ने अपने समकक्षों को महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के मामलों को संवेदनशीलता से निपटने की हिदायत भी दी है। एक छह साल की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में दोषी को सजा सुनाते हुए सेशन कोर्ट ने यह टिप्पणी कीं। कोर्ट ने दोषी पर लगाए गए 15 हजार रुपए जुर्माने की रकम को पीडि़त बच्ची को बतौर मुआवजा देने के निर्देश भी दिए।
द्वारका की एडिशनल सेशन जज ममता तायल ने 21 वर्षीय विनोद को दुष्कर्म का दोषी पाते हुए 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई। एएसजे ने अपने फैसले में कहा, ‘यौन हिंसा पीडि़त को अपमानित करती है। पीडि़त एक बेसहारा और निर्दोष बच्ची हो, तो यह एक बेहद दर्दनाक अनुभव है। एक दुष्कर्मी न सिर्फ पीडि़त को शारीरिक चोट पहुंचाता है, बल्कि एक महिला के गरिमा, सम्मान और प्रतिष्ठा पर एक निशान छोड़ देता है।’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 21 जून 2010 को 6 वर्षीय बच्ची अपने बड़े भाई के साथ मालवीय एंक्लेव स्थित झुगगी की सीढ़ी पर खेल रही थी।
आरोपी विनोद, जो उसका चाचा था, उसे अपने रिक्शे में बिठाकर एक प्लॉट में ले गया। यहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसे एक मंदिर के पास छोड़कर भाग गया। इस बारे में किसी को न बताने की धमकी भी दी।
अगली सुबह बच्ची की मां को इस बात का पता लगा और उन्होंने पुलिस में इसकी शिकायत दी। इसके बाद बच्ची का मेडिकल कराने के बाद उसके बयान दर्ज किए गए और विनोद को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में अभियोजन पक्ष ने 17 गवाहों को अदालत में पेश किया।
द्वारका की एडिशनल सेशन जज ममता तायल ने 21 वर्षीय विनोद को दुष्कर्म का दोषी पाते हुए 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई। एएसजे ने अपने फैसले में कहा, ‘यौन हिंसा पीडि़त को अपमानित करती है। पीडि़त एक बेसहारा और निर्दोष बच्ची हो, तो यह एक बेहद दर्दनाक अनुभव है। एक दुष्कर्मी न सिर्फ पीडि़त को शारीरिक चोट पहुंचाता है, बल्कि एक महिला के गरिमा, सम्मान और प्रतिष्ठा पर एक निशान छोड़ देता है।’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 21 जून 2010 को 6 वर्षीय बच्ची अपने बड़े भाई के साथ मालवीय एंक्लेव स्थित झुगगी की सीढ़ी पर खेल रही थी।
आरोपी विनोद, जो उसका चाचा था, उसे अपने रिक्शे में बिठाकर एक प्लॉट में ले गया। यहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसे एक मंदिर के पास छोड़कर भाग गया। इस बारे में किसी को न बताने की धमकी भी दी।
अगली सुबह बच्ची की मां को इस बात का पता लगा और उन्होंने पुलिस में इसकी शिकायत दी। इसके बाद बच्ची का मेडिकल कराने के बाद उसके बयान दर्ज किए गए और विनोद को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में अभियोजन पक्ष ने 17 गवाहों को अदालत में पेश किया।

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