शनिवार, 14 मई 2011

नींबूड़ा इन यूएसए यूएसए में थार के कलाकारों ने बिखेरा संगीत का जादू












नींबूड़ा इन यूएसए

यूएसए में थार के कलाकारों ने बिखेरा संगीत का जादू 
बाड़मेर अमेरिका के बं्रसेम मंसूरी स्थित सिल्वर डोलर सिटी में आयोजित वल्र्ड फेस्टिवल में ‘रिदम ऑफ राजस्थान’ के कलाकारों ने थार के लोक गीत, लोक भजन सहित सूफियाना गायकी से अपने फन का लोहा मनवाया ।
थार के अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार फकीरा खां ने बताया कि डेढ़ माह तक चले फेस्टिवल में करीब 40 देशों के कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। शुक्रवार को स्वदेश लौटने पर बिसाला निवासी कलाकार फकीरा खां, रामसर निवासी जाकब खां एवं भीयाड़ निवासी पप्पा मीर का कलाकार कॉलोनी व जिलानी युवा ग्रुप की ओर से आत्मीय स्वागत कर उन्हें बधाई दी।
वल्र्ड फेस्टिवल में थार के कलाकारों को सुनने के लिए कला प्रेमियों का हुजूम उमड़ पड़ा। थार के कलाकारों ने बाबा रामदेव, भगवान कृष्ण एवं मीरा के भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं निंबूड़ा=निंबूड़ा व घोर बंद नखराळी लोक गीत की प्रस्तुति खूब तालियां बजी। सूफियाना में बाबा गोलेच्छा शाह लतीफ के साथ धमाधम मस्त कलंदर गीत की प्रस्तुति को श्रोताओं ने एकाग्रचित्त होकर सुना।
फकीरा खां ने बताया कि ‘रिदम ऑफ राजस्थान’ के कलाकारों के बेहतरीन प्रदर्शन पर वल्र्ड फेस्टिवल के डॉयरेक्टर ने थार के कलाकारों को प्रशंसा पत्र सौंपने के साथ ही इन्हें आगामी कार्यक्रम के लिए भी आमंत्रित किया है। इससे पूर्व भी थार के कलाकार 50 देशों में संगीत का जादू बिखेर चुके हैं। फकीरा खां के अनुसार वे वर्ष 2011 में चौथी बार अमेरिका जाकर मारवाड़ के संगीत का लोहा मनवाया है। 
इन्होंने किया स्वागत 
अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकारों का कलाकार कॉलोनी में नगा खां, बसरा खां, जोगा खां, सतार खां, सलायत खां व आपा खां ने स्वागत किया। इसी तरह जिलानी ग्रुप की ओर से शौकत सेक, मांगू खां, घपा खां एवं तालब खां ने स्वागत कर कलाकारों को बधाई दी। 

युवा कलाकारों को संदेश 

 
अंतरराष्ट्रीय कलाकार फकीरा खां ने बताया कि संगीत हमारे जेहन में है। सच्चा कलाकार वहीं है जो अपनी कला को निस्वार्थ भावना से अपने शिष्य को सुपुर्द करें। ऐसा करने से ही लोक कला की पहचान कायम रहेगी। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य, समाज एवं राष्ट्र का विकास सही मायने में संस्कार युक्त शिक्षा पर ही निर्भर करता है। इसलिए युवा पीढ़ी को जहां तक हो सके अधिक से अधिक उच्च शिक्षा दिलानी चाहिए। संस्कार और संगीत तो इस माटी से जुड़ा है। आवश्यकता है तो सिर्फ बच्चों को संगीत के लिए प्रेरित करने की। पारंपरिक लोक संगीत को बचाने के लिए उन्होंने गुरु=शिष्य परंपरा पर जोर दिया। फकीरा खां के अनुसार यही वो मार्ग है जिससे कला को आजीवन जीवंत रखना संभव है।

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