राजस्थान भाजपा का डेमेज कण्ट्रोल यही टीम वर्क तीन साल पहले किया होता तो ये दिन नही देखने पड़ते भाजपा को*



*भाजपा की राजस्थान में पतली हालत से केंद्रीय नेतृत्व भी वाकिफ है।राजस्थान में बुरी हालत के बाद भी केंद्रीय नेतृत्व को ठोस निर्णय नही ले पा रहा केंद्रीय नेतृत्व को डर हेकि वसुंधरा राजे को वर्तमान हालत का जिम्मेदार मान हटाया तो वसुंधरा राजे अलग दल बना सकती है।अब चूंकि हालत इतने बुरे है कि केंद्रीय नेतृत्व को भी लग रहा कि वसुंधरा को ही जिम्मीदरी जितने की दी जाए।।यही सोच वसुंधरा को फ्री हैंड किया।।कल मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कभी भी मंत्री मंडल का पुनर्गठन ह्योग जिसमे कई चोंकाने वाले नाम आएंगे।।इसके बाद मंत्रियों और सांसदों और संगठन पदधिकारियोँ को जिलो में तीन तीन दिवस के प्रवास की जिम्मीदरी दी है जिसके चलते रूठो को मनाना मुख्य कार्य रहेगा।।लेकिन सूची देखने के बाद यह लग रहा है कि कई जिलों को प्रभावहीन लोगो को जिम्मीदरी दी है।मसलन बाड़मेर रामचरण बोहरा को दिया।जबकि बाड़मेर में राजपूत मंत्री या अर्जुन मेघवाल या संगठन के व्यक्ति को जिम्मीदरी दी जाती तो प्रभावी होता।ऐसे है अर्जुन मेघवाल को जैसलमेर दिया।जबकि अर्जुन मेघवाल के लिए जैसलमेर में करने को कुछ नही होगा।।जबकि होना यह चाहिए था कि जिस नेता का प्रभाव जिस क्षेत्र में है उन्हें वहां भेज दिया जाता।चूंकि यह कवायद बहुत देर से शुरू हुई है तो इसके परिणाम कितने सार्थक रहेंगे यह भाजपा के लोग ही बेहतर बता सकते है ।राजस्थान की जनता का मानस वसुंधरा राजे सरकार पढ़ने में कितनी सफल होगी यह भविष्य के गर्भ में है।।मगर जनता इन नेताओं को भली भांति पढ़ चुके।।जैसलमेर में प्रभारी के रूप में अमराराम और बाड़मेर में सुरेंद्र गोयल के होने का कितना फायदा हुआ यह सब जानते है।।बाड़मेर में खत्म हो चुके संगठन में जान डालने का प्रयास प्रो महेंद्र सिंह राठौड़ ने जरूर किया।।मगर जिला अध्यक्ष के असहयोग के साथ पैराशूट नेता कभी पार्टी के साथ संजीदगी और जिम्मीदरी के साथ खड़े नही दिखे।।वसुंधरा राजे अब जितनी ताकत झोंक रही है इतनी या इससे आधी ताकत तीन साल पहले झोंकी होती तो यह नोबत नही आती।।*

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