राजस्थान में 24 घंटे में दो बाघों की मौत, एक बाघ एक माह से लापता

राजस्थान में 24 घंटे में दो बाघों की मौत, एक बाघ एक माह से लापता
राजस्थान के दो अभ्यारण्यों में 24 घंटे में दो बाघों की मौत हो गई। सरिस्का अभ्यारण्य में सोमवार रात बाघ एसटी-11 की तारबंदी में फंसने से मौत हुई थी। वहीं, मंगलवार सुबह रणथम्भौर अभ्यारण्य से सटे छाण गांव में घुसे बाघ टी-28 की वन विभाग की टीम द्वारा ट्रेंक्यूलाइज (रेस्क्यू ) किए जाते समय मौत हो गई। बाघ एसटी-11 की मौत का कारण बनी तारबंदी अभ्यारण्य के पास कालामेढ़ा इलाके में अपने खेत में एक किसान ने कर रखी थी। किसान भगवान सहाय प्रजापत का कहना है कि नीलगाय से फसल को बचाने के लिए उसने अन्य किसानों के साथ मिलकर तारबंदी की थी। भगवान सहाय प्रजापत को गिरफ्तार कर लिया गया है ।




मंगलवार को मृत बाघ का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें कंटीले लोहे के तारों में गर्दन फंसने से उसकी मौत की बात सामने आई है। कालामेढ़ा सरिस्का अभ्यारण्य के बिल्कुल निकट है। कई बार बाघ सहित अन्य जानवर रात के समय अभ्यारण्य से निकलकर कालामेढ़ा के आबादी क्षेत्र की तरफ चले जाते है। सरिस्का बाघ परियोजना क्षेत्र के प्रभारी गोविंद भारद्वाज का कहना है कि कालामेढ़ा इलाके के समीप बाघ का का शव पड़ा होने की सूचना सोमवार रात को मिली। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारी मौके पहुंचे और शव को कब्जे में लिया।पूछताछ में ग्रामीणों ने बताया कि नीलगाय से अपनी फसल को बचाने के लिए किसान भगवान सहाय प्रजापत ने अपने खेत में तारबंदी की थी,इस तारबंदी में ही बाघ एसटी-11 की गर्दन फंस गई। घटना स्थल से मिले साक्ष्यों से पता चला है कि गर्दन में तार फंसने के बाद बाघ जंगल की ओर भागने लगा, जिससे फंदा कसता गया और दम घुटने से उसकी मौत हो गई। मृत बाघ के अगले पंजे पर गहरे घाव भी मिले हैं। इधर, रणथम्भौर अभ्यारण्य के पुराने बाघों में से एक टी-28 मंगलवार सुबह पास के ही छाण गांव में घुस गया। अचानक बाघ को गांव में देख ग्रामीणों ने लाठियों से खदेड़ने का प्रयास किया। शोरशराबा देख बाघ ने वापस अभ्यारण्य में भागने का प्रयास किया। इसी दौरान बाघ टी-28 ने एक ग्रामीण पर हमला कर दिया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया।




इससे घबराए ग्रामीण अपने घरों की छत पर चढ़कर शोर मचाने लगे। सूचना पर वन विभाग की टीम गांव में पहुंची और बाघ को टेंक्यूलाइज किया गया, संभवतया इसी दौरान उसकी मौत हो गई। रणथम्भौर के फील्ड डायरेक्टर वाई.के.साहू ने बताया कि टी-28 के गांव में घूसने की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची,काफी मशक्कत के बाद बाघ को रेस्क्यू किया गया। बाघ को ले जा रहे थे उसी वक्त उसकी मौत हो गई । मौत के कारणों का अधिकारिक खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।




उल्लेखनीय है कि सरिस्का एक बार पूरी तरह से बाघ विहिन हो गया था। लेकिन पिछले एक वर्ष से इसको फिर से आबाद करने के प्रयास शुरू हुए हैं। इसी के तहत रणथम्भौर अभ्यारण्य से लाकर 12 बाघों को यहां बसाया गया है। इनमें से एक एसटी-5 करीब एक माह से लापता है, वहीं एसटी-11 की सोमवार रात मौत हो गई।

0 टिप्पणियाँ:

Post a Comment

 
Top