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जालोर में सामान्य होने लगे हालात

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर चल रहा राहत कार्य

जालोर, 2 अगस्त। अतिवृष्टि के कारण जालोर में पैदा हुए बाढ़ के हालात अब सामान्य होने लगे हैं। जिला प्रशासन की सतर्कता के साथ ही सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों के प्रयासों से अब जालोर में स्थिति नियंत्रण में है। प्रशासन लगातार लोगों को राहत पहुंचाने में जुटा हुआ है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रसद सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति अनवरत जारी है। मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए मेडिकल टीमें मिशन मोड पर अपनी जिम्मेदारी को बखूबी अंजाम दे रही है। राहत कार्यों से जुडे़ सभी विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ लोगों को संकट की इस घड़ी से बाहर निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बुधवार को भी राहत कार्य जोर-शोर से जारी रहे।

जिला कलेक्टर श्री एल.एन. सोनी ने बताया कि सभी विभागों और आमजन के सहयोग से अब स्थितियां काबू में है। बाढ़ प्रभावित हर गांव में राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं। जनप्रतिनिधियों के साथ ही उपखण्ड अधिकारी, विकास अधिकारी एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौके पर जाकर और हालातों का जायजा लेकर लोगों को तत्काल राहत पहुंचा रहे हैं। फसल एवं अन्य खराबे का आकलन भी करवाया जा रहा है ताकि लोगों को शीघ्र सहायता दी जा सके। बारिश से बाधित कई मार्गों पर यातायात सुचारू हो गया है। ज्यादातार इलाकों में बिजली आपूर्ति भी चालू हो गई है। मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए मेडिकल टीमें लोगों को राहत देने में जुटी हुई है।

बुधवार को आहोर विधायक श्री शंकर सिंह राजपुरोहित, उपखण्ड अधिकारी श्री राजेन्द्र सिंह सिसोदिया सहित अन्य अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित आकोली, चांदना, डूडसी, डीगांव, नागणी, भेटाला और बागरा सहित अन्य गांवों का दौरा किया और वहां मूलभूत आवश्यकताओं को सुचारू करवाया। आहोर उपखण्ड में मादरी, दयालपुरा, गांगावा, चरली, सनवाड़ा, काम्बा, खारा और जोगावा सहित अन्य गांवों में राहत कार्यों के साथ-साथ मेडिकल टीमों ने लोगों का उपचार किया।

33 केवी के 232 में से 229 जीएसएस से बिजली आपूर्ति बहाल

जिला कलेक्टर ने बताया कि जालोर जिले के सभी उपखण्डों में विद्युत आपूर्ति लगभग बहाल हो चुकी है। उन्होंने बताया कि केवल उन्हीं क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बंद है, जहां बाढ़ का पानी भरा हुआ है और विद्युत आपूर्ति शुरू करने से खतरे की आशंका है। उन्होंने बताया कि 33 केवी के 232 जीएसएस में से 229 जीएसएस से विद्युत आपूर्ति सुचारू हो गई है। शेष 3 जीएसएस से विद्युत आपूर्ति सुचारू करने का काम तेजी से चल रहा है। इसी तरह 11 केवी के 1149 फीडरों में से 1079 फीडरों की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह चालू है। उन्होंने बताया कि जालोर जिले के 794 गांवों मेंसे 716 में बिजली सप्लाई चालू है। केवल 78 गांव अभी प्रभावित हैं, जिनमें से सांचैर पंचायत समिति के 59, चितलवाना के 17 और रानीवाडा पंचायत समिति के केवल 2 गांव शामिल हैं। इनमें क्षेत्रों में बाढ़ का पानी भरा होने के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित है।

3100 गौवंश का उपचार

श्री सोनी ने बताया कि जिले में बाढ़ के कारण प्रभावित हुई गौशालाओें में भी राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं। जालोर के साथ-साथ जोधपुर एवं बाड़मेर के कार्मिकों को भी गौशालाओं में राहत कार्यों के लिए नियोजित किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में 14 सीनियर वेटरनरी आॅफिसर तथा वेटरनरी आॅफिसर एवं 21 वेटरनरी असिस्टेंट तथा पशुधन सहायकों को लगाया गया है। पशु चिकित्सकों की टीमों ने अब तक करीब 3100 गौवंश को उपचारित किया है। इसमें 1306 गौवंश नंदीशाला गोलासन, 1182 गौवंश पथमेड़ा गौशाला तथा 571 गौवंश पालड़ी गौशाला के उपचारित किए गए हैं।

गौशालाओं को अनुदान की किस्त जारी

जिला कलेक्टर ने बताया कि निर्धारित नियमों के तहत गौशालाओं को दी जाने वाली सहायता के तहत 52 गौशालाओं को 90 दिवस की आर्थिक सहायता दो किस्तों में दी जानी है। इसके तहत 52 गौशालाओं को प्रथम किस्त के रूप में 5 करोड़ 61 लाख 12 हजार रूपए का अनुदान जारी किया जा चुका है तथा 32 गौशालाओं को दूसरी किस्त के रूप में 4 करोड़ 36 लाख 83 हजार रूपए का अनुदान दे दिया गया है। नंदी गौशाला, गोलासन को एक माह की अतिरिक्त सहायता के रूप में करीब एक करोड़ रूपए की राशि दी गई है। जिला कलेक्टर ने कहा है कि जिन गौशालाओं को दूसरी किस्त नहीं मिली है, वे शीघ्र अपने दावा बिल प्रस्तुत करें ताकि उन्हें दूसरी किस्त जारी की जा सके।

5 हजार रोगियों का इलाज

जिले में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए 18 मोबाइल तथा 10 रेपिड रेस्पोंस टीमें लगातार जुटी हुई हैं। चितलवाना ब्लाॅक में 4 और अन्य सात ब्लाॅक में 2-2 मोबाइल टीमें लगाई गई हैं। इसके अलावा ब्लाॅकवार एक-एक और दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रेपिड रेस्पोंस टीम लगाई गई है। अब तक करीब 5 हजार रोगियों का उपचार किया गया है। विभाग की ओर से जल भराव के 24 स्थानों पर गम्बुसिया मछली भी डाली गई हैं, ताकि लार्वा पैदा नहीं हो। साथ ही मकानों में पायरिथिरिम का स्प्रे करवाया जा रहा है। करीब 480 गांवों में एमएलओ डलवाया गया है। घरों में बने पानी के टांकों में टेमीफाॅस डलवाया जा रहा है।

बीमारियों के प्रति जागरूकता के लिए नई पहल

चिकित्सा विभाग ने मौसमी बीमारियों डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि से बचाव के लिए नई पहल की है। इसके तहत विभाग की टीम घर-घर जाकर बच्चों को मौसमी बीमारियों के कारणों और बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक कर रही है। इन बच्चों को कमाण्डो बनाया जा रहा है, जो अपने परिवार के लोगों को मौसमी बीमारियों की रोकथाम के तरीके बताएंगे। विभाग ने इसके लिए पोस्टर भी जारी किए हैं। इसमें बच्चे मौसमी बीमारियों से बचाव का संदेश दे रहे हैं।

52 मार्गों पर यातायात शुरू

श्री सोनी ने बताया कि अतिवृष्टि से जिले की 145 सड़कें बाधित हो गई थीं, जिनमें से 52 सड़कों पर यातायात शुरू हो गया है तथा शेष सड़कों पर आवगमन सुचारू करने का काम तेजी से चल रहा है। सांचैर-रानीवाड़ा-मण्डार सड़क पर जेतपुरा पुल के पास, जालोर-भीनमाल-रानीवाड़ा सड़क पर कोड़ी नदी पर तथा भीनमाल-पुनासा मार्ग पर नोहरा की नदी के पास कार्य तीव्र गति से चल रहा है। जेतपुरा तथा कोड़ी पर हल्के वाहनों का यातायात शुरू कर दिया गया है।

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