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जैसलमेर में दिखे सफेद पर वाले लुप्तप्राय गिद्ध


जैसलमेर के डेजर्ट नैशनल पार्क में सफेद पंख वाले लुप्तप्राय गिद्ध देखे गए हैं। आईयूसीएन की रेड लिस्ट में उन्हें अत्यधिक संकटग्रस्त घोषित किया गया था। ये सामान्यतः पाकिस्तान में पाए जाते हैं, इन्हें जैसलमेर में देखा गया है।

गिद्धों की प्रजाति को नुकसान उन मवेशियों को खाकर हुआ जिनके इलाज में डायक्लोफेनैक का इस्तेमाल किया गया था। 1988 में इंटरनैशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने इसके लोअर रिस्क के कैटिगरी में रखा और 2000 में इसे अत्यधिक संकटग्रस्त की श्रेणी में रखा। 


एनिमल माइक्रोबायॉलजी एवं वाइल्ड लाइफ में पीएचडी कर चुके संरक्षणकर्ता दौलाल बोहरा ने कहा, 'यह बेहद सकारात्मक संकेत है जिससे यह पता चला है कि सीमा पार जानवरों पर पेन किलर डायक्लोफेनैक का इस्तेमाल खत्म हो गया है। 1990 में डायक्लोफेनैक दवाई के इस्तेमाल से गिद्धों की 4 प्रजातियां भारतीय उपमहाद्वीप से 99 प्रतिशत खत्म हो गई थीं। 1985 में भारत में 8.0 करोड़ सफेद पर वाले गिद्ध हुआ करते थे, लेकिन अब कुछ हजार ही रह गए हैं।'हालांकि, 20वीं सदी की शुरुआत में दक्षिण-पूर्व एशिया से ये लुप्त होने शुरू हुए। भारत में 2000-2007 के बीच इनमें 43.9 प्रतिशत की कमी आई। 90 के दशक में यह सबसे अधिक लुप्त हुए। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नगर परकार में 20-25 नर-मादा जोड़े बचे हैं, जबकि भारत में आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

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