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बाड़मेर। बाबूलाल प्रकरण: सीएम से की सभापति एवं दोषियों को गिरफ्तार की मांग ,चौथे दिन जारी रहा बेमियादी धरना


बाड़मेर। कलक्टर मुख्यालय के सामने ठेकेदार बाबूलाल मेघवाल आत्महत्या प्रकरण को लेकर चल रहा बेमियादी धरना चौथे दिन भी जारी रहा। इस बीच राजस्थान मेघवाल परिषद ने आरोप लगाया हैं कि सभापति अपने अपराध एवं घोटालों पर पर्दा डालने की नई साजिश रच रहे हैं इसी साजिश के तहत एक दिन पहले नगरपरिषद कर्मचारियों को आगे कर उनसे जिला कलक्टर को ज्ञापन दिलवाया गया हैं। परिषद ने सीएम को भेजे ज्ञापन मे मांग उठाई हैं कि बाबूलाल को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी नगरपरिषद के सभापति लूणकरण बोथरा एवं अन्य नामजद किए गये कार्मिकों की तत्काल गिरफ्तारी करवाई जावे। ज्ञापन मे स्थानीय पुलिस के रवैये एवं ढीलेपन की घोर निंदा की गई हैं।
news के लिए चित्र परिणाम

परिषद के जिलाध्यक्ष मूलाराम मेघवाल ने बताया कि 20 मई को ठेकेदार बाबूलाल मेघवाल ने अपने ठेकेदारी व्यवसाय मे सभापति एवं अन्य दोषी कार्मिकों द्वारा प्रताड़ित एवं अपमानित किये जाने के कारणों का उल्लेख करते हुए आत्महत्या की। सदर थाने मे इस मामले मे दर्ज एफआईआर मे नामजद आरोपियों पर पुलिस ने आज तक हाथ नही डाला। गुरूवार को बेमियादी आंदोलन शुरू किए जाने पर पुलिस ने मजबूरन बयान आदि लेने की कार्यवाही चालू की। आरोपियों पर साफ इल्जाम मृतक द्वारा अपने सुसाइड नोट मे लगाये जाने के बावजूद भी पुलिस इन्हें बचाने को आमादा हैं जो शर्मनाक हैं जिसकी दलित समुदाय कड़ी निंदा करता हैं।

उन्होने बताया कि रविवार को धरना स्थल पर पहुंचे मौजीज लोगों मे सर्व मूलाराम मेघवाल अध्यक्ष, हितेष गोदारा, तेजाराम सियोल, अमन गोयल, विजयराज सहारण छात्रसंघ अध्यक्ष उदाराम पूर्व प्रधान, नवाराम मंसूरिया, केवलचंद बृजवाल, छगन एडवोकेट, मांगाराम मेघवाल, चेतनराम, राणाराम, मांगीलाल पंवार, हरखाराम, सोहन मंसूरिया, ठाकराराम मंसूरिया, गिरीष मंसूरिया, अषोक पूनड़, महेषाराम, किषनाराम, लाभूराम पंवार, धुड़ाराम, देराजराम, भंवराराम अणखीया, गोरधनराम, दिनेष कुमार, मूलाराम, राउराम पंवार, हंजारीराम, अचलाराम बायतु, जैताराम सेजू, हरखाराम भी शामिल थे।

पुलिस और आरोपियों की मिली भगती
उन्होने बताया कि पुलिस पूरे मामले मे लीपापोती करने को आमादा हैं। पुलिस कस्टडी मे पड़े सुसाइड नोट की फोटो प्रतियां आरोपी पक्ष के लोगों को दी जा रही हैं। आरोपी नगरपरिषद सभापति एवं उसके राजनीतिक आकाओं के दबाव मे आकर नगरपरिषद के कर्मचारियों ने अपेन भ्रष्ट कारनामों पर पर्दा गिराये रखने के लिए शनिवार को एकत्रित होकर कलक्टर को बाबूलाल प्रकरण मे ज्ञापन सौंपा। उन्होने वर्तमान सभापति के कार्यकाल मे नगरपरिषद मे हुए ठेकों, कोटेषन पर करवाये गये कार्यो, सप्लाई के कार्यो आदि की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाने की मांग की हैं। इससे यह सामने आ सके कि सभापति ने पुराने और खासकर दलित ठेकेदारों को नगरपरिषद से जबरन बाहर करने एवं उन्हें परेषान करने के लिए अपने चहेते सप्लायरों एवं ठेकेदारों को विधि विरूद्व जाकर किस ढंग से उपकृत किया हैं।

उन्होने बताया कि घटना के करीबन 28 दिन बाद भी पुलिस एवं प्रषासन पूरे मामले मे चुप्प हैं। उनकी तरफ से कोई जानकारी साझा नही की जा रही हैं कि पूरे प्रकरण मे वह किस नतीजे पर क्यों एवं कैसे पहुंचे हैं? इसी तरह प्रषासन ने भी नगरपरिषद मे व्याप्त भ्रष्टाचार के मामले की जांच किसी अधिकारी को नही दी हैं जबकि मृतक ने कईं मुद्दों का खुलासा अपने सुसाईड नोट मे कर जांच की मांग की हैं।

उन्होने आरोप लगाया कि उच्चस्तरीय सरंक्षण प्राप्त आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस एवं प्रषासन खामोष हैं इससे दलित समाज मे आक्रोष बढता जा रहा हैं। उन्होने कहा कि 1 सप्ताह मे भी पुलिस ने कोई नतीजा नही निकाला और आरोपियों पर कार्यवाही नही की तो बाबूलाल प्रकरण की गूंज पूरे जिले, संभाग और प्रदेष स्तर पर फैलाई जावेगी। इसके लिए समाज स्तर पर तत्काल फैसला किया जायेगा।

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