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कन्नौज अपहरण कांड में चल रही सीबीसीआईडी जांच का मामला

कन्नौज अपहरण कांड में सी.बी. सी.आई.डी. जांच शुरू

एजेंसी ने रिकॉर्ड किया वीपीआई प्रमुख भरत गांधी का बयान

उ. प्र. प्रदेश सरकार की मंजूरी मिलते ही कन्नौज अपहरण कांड में सीबीसीआईडी ने जांच शुरु कर दी है। सी.बी. सी.आई.डी. ने सबसे पहले याचिकाकर्ता और वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल (वीपीआई) प्रमुख भरत गांधी का बयान जानकीपुरम विस्तार लखनऊ में उनके आवास पर रिकॉर्ड किया। अपने बयान में भरत गांधी ने बताया कि कन्नौज अपहरण कांड की पूरी साजिश पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा अपनी पत्नी को कन्नौज लोकसभा क्षेत्र से निर्विरोध सांसद बनाने के लिए द्वारा रची गई थी, क्योंकि फिरोजाबाद में राजबब्बर से हारने के बाद अखिलेश यादव फिर से कोई जोखिम नही लेना चाहते थे। वीपीआई प्रमुख ने बताया कि उनकी पार्टी के प्रभात पांडे, सादेश यादव और राम सिंह लोधी का उस समय अपहरण कर लिया गया, जब प्रभात पाण्डे कन्नौज लोकसभा क्षेत्र उपचुनाव के लिए वीपीआई के प्रतिनिधि के तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल करने जा रहे थे।

याचिकाकर्ता भरत गांधी ने बताया कि शहर की पुलिस अपहरणकर्ताओं की खुलेआम मदद कर रही थी। तत्कालीन जिलाधिकारी सिल्वा कुमारी जे. पूरे अपहरण कांड की संरक्षिका थीं और चुनाव आयोग की बजाय अखिलेश यादव के प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रही थीं। श्री गांधी ने सीबी सीआईडी को बताया है कि अपहरण करने के लिए सभी अपराधियों को सफेद कुर्ते-पायजामे और सफेद पैंट-शर्ट में लगाया गया था। शायद ऐसा इसलिए किया गया था कि उनको पहचानना मुश्किल हो। अपहरण के लिए ललकारने वाले लोग अलग थे, जो नामांकन करने वाले लोगों को दबोच कर उनके नामांकन पत्रों को फाड़ कर टुकड़े-टुकड़े कर देते थे और हवा में उड़ा दिया दिया करते थे। इसके बाद बारी आती थी स्थानीय पुलिस अधिकारियों और कोतवाल की, जो नामांकन करने वालों और उनके प्रस्तावकों को मारते-पीटते और धकियाते हुए कन्नौज कलेक्ट्रेट परिसर में खड़ी उन चमचमाती गाड़ियों में धकेल देते थे, जिन पर समाजवादी पार्टी का झण्डा लगा रहता था। गाड़ी में पहले से बैठे हुए अपराधी अपनी पिस्तौल अपहरण का शिकार लोगों की कनपटी पर लगाकर गाड़ी की सीट के नीचे दुबककर बैठ जाने के लिए विवश करते थे। इसके बाद अपहरण के शिकार लोगों की आंखों पर गमछा बांध दिया जाता था, जिससे वह किसी व्यक्ति को या किसी जगह को पहचान न सकें। फिर गाड़ी का ड्राइवर अपहरण के शिकार लोगों को किसी कोल्ड स्टोर में ले जाता था, जहां पर उनके आंखों पर बंधे गमछे को खोल दिया जाता था और पानी पिलाया जाता था। इसके बाद आंखों पर पट्टियां दोबारा बांधकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया जाता था, जहां सैकड़ों लोगों को अपहृत करके सप्ताह भर से रखा गया था। 06 जून 2012 को नामांकन पत्र भरने की अंतिम तिथि थी। उस दिन शाम को अपहरण के शिकार सभी लोगों को सुदूर जंगलों में ले जाकर छोड़ दिया गया। यद्यपि यह जांच का विषय है कि कुछ लोगां की हत्या की गयी, या नहीं।

राजनीतिक सुधार के लिए भरत गांधी का प्रस्ताव लगभग सभी पार्टियों के 137 सांसदों ने संसद में पेश किया था। राज्य सभा की स्टैंडिंग कमेटी ने सन 2011 में भरत गांधी की कुछ बातें लागू करने की सिफारिश भी की थी। इसके बावजूद भी जब कानून नहीं बना, तो श्री गांधी के देशव्यापी समर्थकों ने वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल का गठन किया। यह पार्टी राजनीति से अपराध दूर करने के एजेंडे पर कार्य कर रही है। इसलिए पार्टी ने अपहरण काण्ड के शिकार कुछ लोगों से सम्पर्क किया और संयुक्त रूप से कानूनी कार्यवाही करने की मांग की। किन्तु अपहरण के शिकार लोग अपहरण के दौरान दी गयी यातनाओं से इतने भयभीत थे कि किसी ने भी इस आपराधिक वारदात के विरुद्ध पुलिस या अदालत में आवाज उठाने की हिम्मत नहीं की। अन्त में यह कानूनी लड़ाई वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल को अकेले ही लड़नी पड़ी। यहां तक कि पार्टी के जिन लोगों को कानूनी कार्यवाही करने के लिए अधिकृत किया गया, अखिलेश यादव ने अपने हथियारबंद अपराधियों को उनके घरों पर भेजकर डराया और धमकाया और कानूनी कार्यवाही से हाथ खींच लेने के लिए विवश कर दिया। इसलिए अंत में कानूनी कार्यवाही का सारा जिम्मा भरत गांधी को खुद अपने हाथ में लेना पड़ा। इसीलिए श्री गांधी ने कन्नौज अपहरण कांड को लेकर 22 जनवरी 2013 को सुप्रीम कोर्ट में स्वयं बहस की और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में सारी कानूनी कार्यवाही स्वयं अपने नाम से की। हालांकि इसके लिए उनके ऊपर अखिलेश यादव ने 3 बार जानलेवा हमला कराया किन्तु संयोगवश तीनों बार वह सुरक्षित रहे। इन हमलों के बारे में भी सीबी सीआईडी जांच कर रही है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कन्नौज अपहरण कांड की जांच सीबीसीआईडी से कराने का आदेश पिछले साल 24 फरवरी 2016 को उ. प्र. सरकार को दिया था। किंतु अखिलेश यादव के दबाव में गृह सचिव देवाशीष पाण्डा ने आयोग के आदेश का पालन करने से मना कर दिया। मना करने की यह जानकारी सीबीसीआईडी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को और याचिकाकर्ता भरत गांधी को 8 सितम्बर, 2016 के पत्र के माध्यम से उस समय दी, जब सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मांगी गई।

सीबीसीआईडी द्वारा दी गई जानकारी मिलने के बाद आयोग अगला आदेश जारी करने वाला था, किंतु तब तक प्रदेश में सरकार बदल गई। आदित्यनाथ योगी सरकार ने मानवाधिकार आयोग के आदेश के अनुपालन में गत 3 अप्रैल 2017 को शासनादेश जारी करके प्रदेश की सीबीसीआईडी को कन्नौज अपहरण कांड और भरत गांधी के ऊपर किए गए जानलेवा हमलों के मामले में जांच करने की अनुमति दे दी। इस जांच को कराने के लिए सीबीसीआईडी हेडक्वार्टर ने कानपुर के आईजी को अधिकृत किया है। आयोग के निर्देशानुसार भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा देने संबंधित कार्यवाही भी प्रदेश के गृह मंत्रालय द्वारा की जा रही है।

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