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बाड़मेर (नवजात मृत्यु दर को कम करने पर कार्यशाला सम्पन्न)

*** ‘चिरायु- नन्ही जान, हमारी शान’ कार्यक्रम होगा संचालित***



      बाड़मेर, 16 मई। नवजात शिशुओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवायें
प्रदान कर नवजात मृत्यु दर को कमी लाने हेतु प्रदेश के उच्च प्राथमिकता
वाले 8 जिलों, बाड़मेर, धौलपुर, करौली, जालोर, राजसमंद, सवाईमाधोपुर,
सिरोही एवं उदयपुर जिले में ‘चिरायु- नन्ही जान, हमारी शान’ कार्यक्रम
संचालित किया जायेगा।



जिला कलक्टर शिवप्रसाद मदन नकाते की अध्यक्षता में एक दिवसीय जिला स्तरीय
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुये बताया की चिरायु कार्यक्रम नवजात शिशु
मृत्यु दर को कम करने की योजना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुये कार्य
योजना तेयार की जानी है | जिला कलक्टर ने बताया की इस कार्यक्रम में खण्ड
स्तर से बीसीएमओ एवं पीएचसी स्तर से नवजात की मृत्यु होने पर लापरवाही
बरती जायेगी तो उसे अत्यंत गंभीरता से लिया जायेगा एवं अनुशासनात्मक
कार्यवाही की जाएगी, उन्होंने हर नवजात की जान कीमती बताई, एवं प्रत्येक
बच्चे को अपना बच्चा समझते हुये इलाज करे एवं उनके परिजनो का आदर करे |
जिला कलक्टर ने बताया की आमजन तक स्वास्थ्य सेवाए पूर्ण रूप से पहुचाने
एवं नियमित मोनिटरिंग हेतु जिला स्तर खण्ड स्तर एवं पीएचसी स्तर के
चिकित्सा अधिकारी का एक जिला स्तरीय व्हाट्सअप ग्रुप बनाया जावे जिसकी
मोनिटरिंग स्वयं जिला कलक्टर द्वारा की जाएगी |

जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पी.सी. दीपन ने कार्यक्रम की
रुपरेखा एवं कार्यक्रम को विस्तार से बताया एवं कार्यशाला में पधारे सभी
कार्मिको के रोल के बारे में जानकारी दी |

राज्य नोडल अधिकारी डॉ प्रेम सिंह ने बताया की प्रशिक्षित स्वास्थ्य
कार्यकर्त्ता के द्वारा प्रसव करवाकर एवं आवश्यक न्युबोर्न केयर के
द्वारा 25%, सिजेरियन ओपरेशन एवं खून की उपलब्धता के द्वारा 16%, बीमार
एवं कम वजन के नवजात की देखभाल से 30% एवं समुदाय एवं परिवार की जागरूकता
(होम बेस्ड न्युबोर्न केयर) आदि के द्वारा 25 से 30%  नवजात शिशु मृत्यु
दर को कम किया जा सकता है | स्टेट नोडल अधिकारी डॉ देवेन्द्र शर्मा ने
चिरायु कार्यक्रम के लिए खण्ड के लिए कार्य योजना बनाने की प्रक्रिया को
स्पष्ट करते हुये जानकारी दी |

डॉ दीपन ने सभी समस्त बीसीएम्ओ को जून माह तक कार्ययोजना पूर्ण करने के
निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में प्रसूता एवं
बीमार शिशुओं हेतु उपलब्ध रैफरल सुविधाओं में आवश्यक सुधार कर
गुणवत्तापूर्ण सेवायें सुनिश्चित की जायेंगी। उन्होंने राज्य एवं जिला
स्तर पर अधिकारियों व चिकित्साकार्मिकों से सघन सामन्जस्य स्थापित कर
उपलब्ध संसाधनों के उचित उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।



जिला कर्यक्रम प्रबंधक सचिन भार्गव ने बताया की खण्ड के संबंधित
अधिकारियों को अपने खण्ड के गांव-कस्बों व शहर में स्थापित चिकित्सा
संस्थान, आपातकालीन 108, जननी एक्सप्रेस 104 एवं बेस एम्बूलेंस की स्थिति
एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य हेतु संचालित गतिविधियों के अनुसार मैपिंग कर
खण्ड स्तर एवं खण्ड के बाद जिला आधारित कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता
प्रतिपादित की। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र या ब्लाक स्तर पर
रिक्त पदों का चार्ज अन्य कार्मिक को देकर सहयोगात्मक पर्यवेक्षण कर
आरसीएच गतिविधियों को प्रभावी बनाने के निर्देश दिये | भार्गव ने बताया
की इस कार्यक्रम में आशा सहयोगिनियो की अहम भूमिका है कार्यक्रम को सफल
बनाने हेतु आशा सहयोगिनियो के रिक्त पदों को विशेष कार्ययोजना बनाकर आशाओ
का चयन किया जाये ताकि कार्यक्रम को प्रभावी बनाया जा सके ।

जिला आशा समन्वयक राकेश भाटी ने बताया की सभी खण्ड द्वरा आठ समूहों में
अलग-अलग विषयों पर फेसिलिटी बेस्ड नवजात देखभाल ईकाईयों के सुदृढीकरण,
समुदाय आधारित नवजात देखभाल, गुणवत्तापूर्ण प्रसव सेवाओं, डेटा ट्रेकिंग,
वर्तमान स्थिति व गैप्स, प्रसूताओं एवं शिशुओं के लिये उपलब्ध रैफरल
सुविधाओं, वर्तमान स्थिति एवं गैप्स, सहयोगात्मक पर्यवेक्षण, एचआर
प्रबंधन एवं हैल्थ सीकिंग बिहेवियर थीम पर कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत
की गयी।

डॉ दीपन ने बताया की कार्यक्रम को प्रभावी रूप से योजना बनाने हेतु
कार्यशाला में राज्य स्तर के अधिकारी, जिला स्तर के समस्त अधिकारी,
कर्मचारी, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ हरिश चोहान, गायनो डॉ खेताराम, यूनिसेफ
प्रतिनिधि रवि गुप्ता एवं खण्ड स्तर से समस्त बीसीएमओ, समस्त सीएचसी
इंचार्ज, बीपीएम, बीएचएस, पीएचएस, एलएचवी एवं एएनएम आदि उपस्थित रहे |
कार्यक्रम का संचालन जिला कार्यक्रम प्रबंधक सचिन भार्गव एवं जिला आशा
समन्वयक राकेश भाटी द्वारा किया गया |

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