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जयपुर निजी हाॅस्पिटल पर एसओजी की रहेगी पैनी नजर

मनमानी वसूली से मरीजों को मिल सकेगी निजात


राजस्थान हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एसओजी को प्राईवेट हाॅस्पिटल द्वारा वसूली जाने वाली कीमतों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। एसओजी ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। इससे आमजन को राहत मिलने की उम्मीद जागी है।

राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने ज्ञानेन्द्र कुमार पारीक की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक आदेश जारी किया है। जिसमें कहा गया कि एसओजी निजी अस्पतालों में लगातार मिल रही मरीजों से लूट की शिकायतों पर विशेष ध्यान दें और इसकी जांच करके रिपोर्ट 5 जुलाई तक प्रस्तुत करें। उक्त आदेश में मुख्य रूप से हृदय रोग के इलाज में प्रयुक्त होने वाले स्टंट की कीमतों की जांच करने के विशेष निर्देश दिए हैं। आदेश में राज्य सरकार को भी लताड़ लगाई गई है और सवाल किया गया कि निजी अस्पतालों की कीमतों पर नियंत्रण के लिए क्या कदम उठा रही है। यदि अब तक कदम नहीं उठाए गए तो इस पर जल्द से जल्द नियम बनाकर लूट खसोट पर अंकुश लगाया जाए।

बीमा कम्पनी से पुर्नभरण

उक्त मामले में एडवोकेट की दलील पर न्यायाधीश ने कहा कि बीमा कम्पनी से यदि पुर्नभरण हो रहा है, इसका मतलब यह नहीं है कि मनमानी कीमतें वसूली जाए। यदि ऐसा किया जा रहा है तो उनके विरूद्ध कार्रवाई अमल में लाई जाए, जिससे कि आमजन को राहत मिल सके और बेवजह बीमा कम्पनियों से भी अधिक राशि नहीं वसूली जाए।

अजमेर में भी दें ध्यान

हाईकोर्ट ने जो टिप्पणी की है और जो आदेश दिए हैं वह बहुत जरूरी भी है क्योंकि वर्तमान में अधिकांश निजी हाॅस्पिटल में मनमानी कीमतें वसूली जा रही है। वहीं जब बात यदि बीमा होने की आ जाए तो फिर तो कहना ही क्या? ऐसे में अजमेर में भी कई बार निजी अस्पताल संचालकों द्वारा चांदी कूटने की बात सामने आई है लेकिन नियम कड़े नहीं होने और सांठ-गांठ के कारण बात दबा दी जाती है। एसओजी को चाहिए कि अजमेर के प्राईवेट हाॅस्पिटल पर भी पूरा ध्यान दें और जो मनमानी दरें वसूली जा रही है, उस पर अंकुश लगाकर आमजन को राहत पहुंचाए।

जल्द शुरू होगी जांच

अदालत ने जो आदेश दिए हैं इस संबंध में एसओजी के एडीजी उमेश मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आदेश होने की जानकारी मिली है लेकिन फिलहाल आदेश नहीं मिले है।

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