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PALI : देश भर से जुटे चारण बंधू, जाडन में अखिल भारतीय चारण गढ़वी सम्मेलन

PALI : देश भर से जुटे चारण बंधू, जाडन में अखिल भारतीय चारण गढ़वी सम्मेलन
पाली. चारण आदि जाति है, यह पुरातन काल से लेकर आधुनिक भारत तक रियासतों में मार्गदशक की भूमिका में रहे। इसके बावजूद भी इस समाज में कई कुरीतियां हैं, जिसे हर हाल में अब मिटाने की जरूरत है और इसके लिए समाज के युवाओं को आगे आना होगा।

चारण एक धारण, की संकल्पना को आत्मसात करने से ही हमारा समाज आगे बढ सकता है। यह बात महामंडेलश्वर परमहंस स्वामी महेश्वरानंद के जाडण स्थित आश्रम में आयोजित अखिल भारतीय चारण गढवी सम्मेलन में देश भर से आए समाज के प्रबुद्व जनों ने अपने संबोधन में कही।

अखिल भारतीय चारण गढवी महासभा के अध्यक्ष सीडी देवल ने कहा कि हमे समाज में उन्नति करनी है तो आपस में भेदभाव, ईष्र्या तथा द्वेष को त्यागना होगा। उन्होंने कहा कि चारण देवीपुत्र माने जाते हैं, आज भी यह समाज देवियों के बताए सिद्वांतों पर चलता है, इसलिए अब यह आवश्यक हो गया है कि महिलाओं के उत्थान की बात सबसे पहले हो।




महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष एवं राजस्थान पुरातत्व धरोहर प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष औंकारसिंह लखावत ने भी समाज में महिला शिक्षा को बढावा देकर इनकी दशा और दिशा बदलने की बात कही। उन्होंने बालिका शिक्षा और महिला शिक्षा को बढावा देने की बात पर स्वतंत्रता सेनानी केसरीसिंह बारहठ की पौत्री नगेन्द्र बाला, जो कि राजस्थान की प्रमुख महिला जिला प्रमुख रही, की जीवनी का उदाहरण भी दिया।

उन्होंने कहा कि चारण जाति का इतिहास अपने आप में गौरवशाली है, इस समाज में देवियों ने जन्म लेकर हमें गौरान्वित और पुजित किया है। पदमश्री सूर्यदेव बारेठ ने मैं चारण हूं कविता का वाचन कर कार्यक्रम में ऊर्जा का संचार कर दिया। पदमश्री डॉ सीपी देवल ने चारण साहित्य और इतिहास पर प्रकाश डालते हुए युवा पीढी को इसके बारे में जागरूक होने की आवश्यकता जताई।

सम्मेलन को पदमश्री भीखूभाई गढवी, महासभा के उपाध्यक्ष देवीदान भाई गढवी, भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी भंवरसिंह रलियावता, अम्बादान रोहडिया व डॉ गजादान चारण ने विचार व्यक्त किए।

आईश्री और संतों ने दिए आशीर्वचन

अखिल भारतीय चारण गढवी महासभा के सम्मेलन में आई कुं कुं केशरमां तथा आई देवल मां ने अपने आशीर्वचन में समाज के युवाओं में शिक्षा के क्षेत्र में उत्थान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि घर की बहू और बेटी को देवीतुल्य मानो और उसके उत्थान में सहयोग करें।




स्वामी महेश्वरानंद जी ने वियना से ऑनलाइन ही अपना आशीर्वचन दिया और समाज को उत्थान करने की शुभकामनाएं दी। संत भगतराम शास्त्री ने भी चारण समाज के इतिहास और इसकी पौरोणिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चारण अपने अंदर छुपे हनुमान को जगाएं और समाज में कुरीतियों को समाप्त कर नवोत्थान करें। आश्रम के स्वामी फूलपुरी ने भी अपना उदïïबोधन दिया।

लिए कई निर्णय, कमेटियां गठित

चारण समाज के मेधावी विद्यार्थियों के उत्थान के लिए आर्थिक सहयोग एवं सामाजिक उपयोगी सहायता प्रदान करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी का संयोजक कल्याणसिंह कविया को बनाया गया। वहीं राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए चारण समाज का पूरा योगदान देने का निर्णय भी किया गया। देशभर में विभिन्न जगहों पर रह रहे चारण समाज के लोगों को एकसूत्र में बांधने के लिए समयबद्व सामूहिक बैठकें एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने का निर्णय भी किया गया।

जाडन घोषणा पत्र तैयार

सम्मेलन के दौरान गहन चिंतन और विचार विमर्श के बाद विशेष बात यह रही कि चारण गढवी सम्मेलन का जाडन घोषणा पत्र भी जारी किया जिसमें समाज की महिलाओं को अत्याचार, हिंसा और प्रताडना से मुक्त कराने के लिए एक उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति कुटुम्ब सहयोग समिति का गठन भी किया गया। इसका संयोजक चावण्ड दान सांदू भदौरा को बनाया गया है।

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