edvertise

edvertise
barmer



सुकमा।छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बड़ा नक्सली हमला: सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद, आठ लापता
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बड़ा नक्सली हमला: सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद, आठ लापता

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोमवार दोपहर नक्सलियों के हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 26 जवान शहीद हो गए और छह जवान घायल हैं। हमले के बाद से 8 जवान लापता हैं। पुलिस ने मुठभेड़ में 4-5 नक्सलियों के मारे जाने का दावा किया है। नक्सली शहीद जवानों के हथियार भी लूटकर ले गए।




पुलिस के अनुसार चिंतागुफा थाने से संयुक्त पुलिस बल गश्त सर्चिंग के लिए रवाना हुआ था। ग्राम बुरकापाल के समीप जंगल में घात लगाए नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। सूत्रों के अनुसार हमले के वक्त 200-250 से अधिक नक्सली मौजूद थे, जो आधुनिक हथियारों से लैस थे। नक्सलियों के पास मोर्टार भी मौजूद था। नक्सलियों ने यहां जवानों के लिए पहले से ही एंबुश लगा रखा था। जैसे ही जवानों नक्सलियों के उसकी जद में आए नक्सलियों ने जबरदस्त बारूदी सुरंग विस्फोट कर दिया। जवान जब तक संभल पाते पहाडिय़ों में छिपे नक्सलियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।




बस्तर संभाग के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) पी सुंदरराज और सुकमा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिषेक मीणा ने बताया कि मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 74वीं बटालियन के 26 जवान शहीद हुए हैं साथ ही छह जवान गंभीर रूप में जख्मी हो गए हैं। घायल जवानों को हेलीकॉप्टर से रायपुर रैफर किया गया है।




उन्होंने बताया कि मुठभेड़ स्थल पर मौजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्य, खून के धब्बे एवं घसीटे जाने के निशान से यह साबित होता है कि कम से कम 4-5 नक्सली मारे गए हैं और कई लहुलूहान हुए हैं, साथियों के शव नक्सली अपने साथ ले जाने में कामयाब रहे।




हमले की पहले कर ली थी प्लानिंग

सुकमा जिले में नक्सलियों ने जवानों को ट्रेप किया है। जवानों को ट्रेप करने के लिए नक्सलियों ने कई दिनों पहले ही पूरी प्लानिंग कर ली थी, लेकिन वो सही समय और मौके के इंतजार में थे। भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो इस घटना को नक्सलियों की मिलिट्री बटालियन की कंपनी नंबर एक ने अंजाम दिया है और इस पूरे हमले का नेतृत्व नक्सली नेता सीटू ने किया है। इस इलाके की पूरी कमान वैसे तो हिड़मा के हाथों में है और हिड़मा ही इलाके में लीड करता है लेकिन इसके अलावा अर्जुन और सीटू उर्फ सोनू भी यहां सक्रिय हैं।




बुरकापाल के निकट जिस स्थान पर जवान नक्सलियों के एंबुश में फंसे थे, उसके आसपास सुरक्षा बलों के कई कैंप हैं। बताया जा रहा है कि यहां हर पांच किमी में एक कैंप है। ऐसे में नक्सलियों ने चिंतागुफा थाने से महज डेढ़ किलोमीटर दूर ही जवानों को फंसाने के लिए एंबुश लगाया था।




यहां लगभग दो घंटे तक गोलाबारी चली। सूत्रों ने बताया कि चूंकि मुठभेड़ स्थल धुर नक्सल प्रभावी दुर्गम क्षेत्र है और अंधेरा घिर आया है इसीलिए फिलहाल शहीदों के शव को लाना सुरक्षा की ²ष्टि से संभव नहीं है। इस स्थल पर हेलीकॉप्टर उतारना भी संभव नहीं है।




पिछले माह 11 मार्च को ही सुकमा जिले में इंजरम-भेज्जी मार्ग निर्माण को सुरक्षा प्रदान करने रवाना की गयी सीआरपीएफ 219वीं बटालियन की पार्टी से हुयी मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हो गए थे और तीन अन्य गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। उस वक्त भी नक्सली शहीद जवानों के हथियार लूटकर ले गए थे।




वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त सूचना के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अपना दिल्ली दौरा बीच में छोड़ कर रायपुर के लिए रवाना हो चुके हैं। मुख्यमंत्री नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने नई दिल्ली में थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सली हमले को लेकर आपात बैठक बुलाई। जिसमें केंद्रीय गृह सचिव ने हालात पर चर्चा की है।




इस बीच कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने हमले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। मनीष तिवारी ने कहा, "हमला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उम्मीद है कि सरकार हमले के लिए जिम्मेदार लोगों से सख्ती से निपटते हुए समुचित कार्रवाई करेगी।"




इससे पहले दंतेवाड़ा जिले में बम निरोधक दस्ते ने बड़ा माओवादी हमला विफल कर दिया। दंतेवाड़ा राज्य के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित इलाकों में आता है। आज सुरक्षा बलों को दंतेवाड़ा में 10 किलोग्राम IED विस्फोटक मिला था, जिसे नक्सलवादियों ने बड़े हमले के लिए प्लांट किया हुआ था।




इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने पर सुरक्षा बलों ने तत्काल बम निरोधक दस्ते को इसकी जानकारी दी। बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद इस IED विस्फोटक को निष्क्रिय किया। जिससे नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में नक्सलियों की बहुत बड़ी साजिश विफल हो गई।

0 टिप्पणियाँ:

Post a Comment

 
Top