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अजमेर, जिले में विकसित होंगे 10 कन्या उपवन

बालिका जन्म पर लगेगा एक पौधा


अजमेर, 18 अप्रेल। जिले में विभिन्न स्थानों पर 10 कन्या उपवन विकसित किए जाएंगे। इनमें प्रत्येक बालिका के जन्म पर एक पौधा लगाया जाएगा।

जिला कलक्टर श्री गौरव गोयल ने बताया कि जिले में विभिन्न स्थानों पर 10 कन्या उपवन विकसित किए जाएंगे। इनमें से 5 उपवन वन विभाग तथा 5 उपवन जिला परिषद के द्वारा लगाए जाएंगे। उपवन लगाने के लिए ग्राम सभा के माध्यम से जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके आधार पर संबंधित ग्राम में भूमि का चिन्हिकरण करके उपवन विकसित किए जाएंगे। गांव में प्रत्येक बालिका के जन्म लेने पर एक पौधे का रोपण किया जाएगा। इस पौधे की सार संभाल एवं सेवा करके उसे वृक्ष बनाया जाएगा। यह वृक्ष कन्या के साथ-साथ एक भाई की तरह बड़ा होगा। जो बालिका की याद को चिरस्थायी बनाएगा।




विश्व धरोहर दिवस

अजमेर वृत्त के संरक्षित स्मारकों पर सचित्रा प्रदर्शनी का आयोजन


अजमेर, 18 अप्रेल। राजकीय संग्रहालय में विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर मंगलवार को अजमेर वृत के संरक्षित स्मारकों की विवरणात्मक सचित्रा प्रदर्शनी आयोजित का आयोजन किया गया। यह प्रदर्शनी 25 अप्रेल तक आमजन के लिए खुली रहेगी।

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीक्षक श्री जफर उला खां ने बताया कि संग्रहालय की कला पुरासामग्री को विभिन्न दीर्घाओं में प्रदर्शित किया गया है। प्रथम दीर्घा में मोहन-जोदड़ों की उत्खन्नित पुरासामग्री, द्वितीय दीर्घा में प्राचीन प्रस्तर प्रतिमाओं के साथ प्राचीन शिलालेख, प्राचीन धातु प्रतिमाएँ, तृतीय दीर्घा में अस्त्रा-शस्त्रा, प्रस्तर प्रतिमाएँ, लघुचित्रा आदि प्रमुख रूप से प्रदर्शित एवं संग्रहित हैं। वर्तमान में इन संग्रहालय दीर्घाओं का विकास कार्य प्रगति पर है। प्रदर्शनी का आकर्षण राजस्थान व अजमेर क्षेत्रा की प्रस्तर प्रतिमाएँ, प्राचीन मुद्राएँ, शिलालेख, अस्त्रा-शस्त्रा, लघुचित्रा, ताम्र-पत्रा, धातु प्रतिमाएँ एवं स्थानीय कलापुरा सामग्री भी है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग सात वृत्त में विभक्त है। वृत्त अजमेर के अधीन अजमेर, नागौर, भीलवाड़ा एवं टोंक जिले विद्यमान हैं। इन चार जिलों में विभाग के अधीन 47 पुरासम्पदा संरक्षित स्मारक घोषित हैं। इन संरक्षित स्मारकोें के सचित्रा विवरण के साथ प्रदर्शनी लगाई गई है। संरक्षित स्मारकों के आलेख में ऐतिहासिकता एवं स्थापत्यकला शैली का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।

उन्होंने बताया कि प्राचीन पुरासम्पदा के खण्ड़हर, इतिहास की जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। इनकी जानकारी प्राप्त करना मानवीय जिज्ञासा रही है। समृद्धिशाली शासकों ने अधिक संख्या में किलों, महलों, धार्मिक आस्थानुसार मन्दिरों, मस्जिदों एवं जनहित में बावड़ियों आदि का निर्माण करवाया है। इनके अध्ययन से विभिन्न युगों की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं धार्मिक दशा के उतार-चढ़ाव का, अनेक विद्वानों एवं इतिहासकारों द्वारा विश्लेषण किया जाता रहा है। इतिहास लेखन और कला की दृष्टि से भारत में राजस्थान की पुरासम्पदा एवं कला पुरासामग्री का एक विशिष्ट स्थान रहा है। वृत्त अजमेर में प्रागैतिहासिक काल से कला पुरासामग्री एवं पुरासम्पदा हमारी सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विश्व प्रसिद्ध है।

उन्होंने बताया कि वृत्त अजमेर के संरक्षित स्मारकों की सचित्रा प्रदर्शनी, इस क्षेत्रा की पुरासम्पदा को व्यापक परिचय देने में समर्थ रहेगी। यह प्रदर्शनी पर्यटकों, विद्यार्थियों, कला-प्रेमियों, शोधार्थियों तथा इतिहास के जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी एवं ज्ञानवर्द्धक सिद्ध होगी। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा अजमेर वृत्त के इन 47 संरक्षित स्मारकों पर छाया चित्रों सहित पुस्तिका का प्रकाशन किया जा चुका है।



क्लिक योजना से लाभान्वित होंगे राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थी

कक्षा 6 से 10 के विद्यार्थियों को मिलेगा कम्प्यूटर प्रशिक्षण

10वीं कक्षा के प्रशिक्षित छात्रा पाएंगे वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय का प्रमाण पत्रा

अजमेर, 18 अप्रेल। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत संचालित होने वाले विद्यालयों के कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर प्रशिक्षण आरकेसीएल के सहयोग से क्लिक योजना के अन्तर्गत प्रदान किया जाएगा। सफलता पूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के द्वारा प्रमाण पत्रा प्रदान किया जाएगा।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा अभियान अजमेर के एडीपीसी श्री राम निवास गालव ने बताया कि राजकीय माध्यमिक, उच्च माध्यमिक एवं स्वामी विवेकानन्द राजकीय माॅडल विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर प्रशिक्षण प्रदान कर उनमें तकनीकी कौशल विकसित करने के लिए राजस्थान नाॅलेज काॅर्पोरेशन लिमिटेड (आरकेसीएल) के सहयोग से स्वैच्छिक एवं स्ववितपोषित कम्प्यूटर कौशल प्रशिक्षण क्लिक (कम्प्यूटर लिट्रेसी इनिसेटिव फाॅर काॅमप्रेहेंसिव नाॅलेज योजना लागू की गई है। इससे विद्यार्थियों को विद्यालयी शिक्षा के साथ-साथ कम्प्यूटर कौशल की व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जा सकेगी। यह योजना कम्प्यूटर लैब युक्त विद्यालयों में संचालित होगी।

उन्होंने बताया कि इस योजना का लाभ लेने के लिए कक्षा 6 से 10 तक न्यूनतम नामांकन 200 होना आवश्यक है। योजना में पंजीकरण कम होने की स्थिति में कक्षा 5 के विद्यार्थियों को भी प्रशिक्षित किया जा सकता है। इस योजना से जुड़ने के लिए संबंधित विद्यालय की विद्यालय विकास एवं प्रबंध समिति के माध्यम से प्रस्ताव लिया जाएगा। इस प्रस्ताव के आधार पर एसडीएमसी, आरकेसीएल के अधिकृत सूचना प्रौद्योगिकी ध्यान केन्द्र के साथ एमओयू कर प्रशिक्षण आरम्भ करेगी। एमओयू पर हस्ताक्षर के लिए समिति की और से संस्था प्रदान को अधिकृत किया गया है। योजना से जुड़ने के लिए विद्यार्थी एवं उसके अभिभावक की लिखित सहमति आवश्यक रहेगी।

उन्होंने बताया कि योजना के संचालन के लिए कक्षा 6 से 8 के लिए 50 घण्टे, कक्षा 9 के लिए 72 घण्टे तथा कक्षा 10 के लिए 60 घण्टे का पाठ्यक्रम निर्धारित किया गया है। इसके लिए शुल्क कक्षा 6 से 8 के लिए 80 रूपए प्रतिमाह कुल 960 रूपए तथा कक्षा 9 एवं 10 के लिए 110 रूपए कुल 1320 रूपए प्रति माह प्रति विद्यार्थी निर्धारित किया गया है। यह शुल्क समिति द्वारा प्रति माह विद्यार्थियों से लिया जाकर ज्ञान केन्द्र को उपलब्ध करवाया जाएगा। आरकेसीएल विद्यार्थियों से सीधे शुल्क अथवा अन्य राशि नहीं ले सकेगा। विद्यार्थी को किसी प्रकार का परीक्षा शुल्क नहीं देना होगा। सफल विद्यार्थियों को प्रशिक्षण उपरान्त प्रमाण पत्रा कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को आरकेसीएल तथा कक्षा 10 के विद्यार्थियों वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के द्वारा प्रदान किए जाएंगे। खुला विश्वविद्यालय द्वारा प्रमाण पत्रा के लिए प्रति विद्यार्थी 300 रूपए की राशि निर्धारित की गई है। विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि होने पर अतिरिक्त अनुदेशक ज्ञान केन्द्र द्वारा लगाए जाएंगे। अनुदेशक एमसीए, एमएससी, सूचना प्रौद्योगिकी अथवा कम्प्यूटर साईंस, पीजीडीसीए, बीसीए, बीटेक अथवा समकक्ष या अधिक योग्यताधारी होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि आईटी केन्द्र द्वारा प्रशिक्षण समाप्ति के बाद विद्यार्थियों का मूल्यांकन करके प्रमाण पत्रा प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण की माॅनिटरिंग एसडीएमसी एवं शिक्षा विभाग के द्वारा की जाएगी। एसडीएमसी के द्वारा प्राप्त रिपोर्ट अन्तिम मानी जाएगी। योजना के सफल क्रियान्वयान के लिए राज्य स्तर पर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद, जिला स्तर पर जिला निष्पादक समिति एवं विद्यालय स्तर पर एसडीएमसी के द्वारा पर्यवेक्षण किया जाएगा।

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