केकड़ी .सावधान , आप भी ना फस जाए युवतियों की मीठी बातों में ,आपके साथ भी हो सकता है कुछ एेसा
सावधान , आप भी ना फस जाए युवतियों की मीठी बातों में ,आपके साथ भी हो सकता है कुछ एेसा

पुलिस थाने में दुराचार का मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने एवं इसके बदले में पीडि़त पक्ष से रुपए ऐंठने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने पीडि़त की रिपोर्ट पर आरोपित युवक-युवती के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। केकड़ी निवासी एक युवक ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि गत दिनों उसके मोबाइल नम्बर पर एक लड़की ने कॉल कर उसे मददगार स्वभाव का व्यक्ति बताते हुए दोस्ती करने की इच्छा जताई।




गत 3 मार्च को वह किसी कार्य से नसीराबाद गया हुआ था। उस दौरान युवती ने फोन कर उसे अजमेर बुला लिया। मीठी-मीठी बातों के झांसे में वह अजमेर जा पहुंचा, जहां युवती उसकी कार में बैठ गई। वहां से वे दोनों पुष्कर चले गए। तीन दिन बाद उसके पास कचहरी परिसर से फोन आया कि एक युवती उसके खिलाफ दुराचार का मुकदमा दर्ज करा रही है।




मुकदमेबाजी के झंझट से बचने के लिए युवती को पांच लाख रुपए देने होंगे। ब्लैकमेलिंग का अहसास होते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई, लेकिन बदनामी के डर से घबराए युवक ने इस बारे में किसी से कोई बात नहीं की। इसके बाद युवती ने रुपए भिजवाने की बात कहते हुए फोन पर कई बार धमकियां दी। इसी दौरान एक युवक ने युवती को अपनी पहचान वाली बताते हुए मामला सुलटाने की बात कही व पीडि़त से 40 हजार रुपए ले लिए। रूपए लेने के बाद भी ब्लैकमेलिंग का सिलसिला लगातार जारी रहा।




पहले भी बनाए शिकार

पताचला है कि आरोपितों ने संगठित गिरोह बना रखा है जो पहले भी कस्बे के कई युवकों को अपना निशाना बना चुका है। लोकलाज के भय से अधिकतर मामले प्रकाश में नहीं आते। पीडि़तों ने अधिकतर मामलों में रुपए देकर अपना पीछा छुड़वा लिया। कई मामलों में तो रुपए मिलने के बाद भी ब्लैकमेलिंग का सिलसिला जारी रहने की बात सामने आ रही है। बताते हैं कि उक्त गिरोह का संचालन अजमेर से किया जा रहा है। इस गिरोह में केकड़ी के भी कुछ लोग शामिल हंै।




ये पहले शिकार को चिह्नित करते है। इसके बाद फोन पर मीठी-मीठी बातों का जाल बुनकर उन्हें उलझाया जाता है। मिलने-मिलाने का सिलसिला शुरू होने के बाद ब्लैकमेलिंग का दौर शुरू हो जाता है। एक बार चंगुल में आया युवक चाह कर भी वापस बाहर नहीं निकल पाता। इस दौरान यही लोग पीडि़तों को डराने-धमकाने तथा रुपए ऐंठने का काम करते हैं। रुपए ऐंठने के बाद उसमे से एक निश्चित राशि गिरोह तक पहुंचा दी जाती है। पीडि़तों में सफेदपोश, व्यापारी पुत्र एवं कई अन्य रईसजादे शामिल बताते हैं।

अजमेर ब्लैकमेल कांड की यादें हुई ताजा

ब्लैकमेलिंग कांड का मामला प्रकाश में आते ही 25 साल पहले अजमेर में घटित हुए छायाचित्र ब्लैकमेल कांड की यादें ताजा हो गई। अजमेर कांड में आरोपितों ने वर्ष 1987 से 1992 के बीच स्कूल-कॉलेज की छात्राओं से दोस्ती गांठी। इसके बाद उन्हें अपने चंगुल में फांसा तथा आपत्तिजन फोटो खींच कर उन्हें ब्लैकमेल किया। इसके बाद पीडि़ताओं को सहेलियों से दोस्ती करवाने का दबाव बना कर उन्हें भी चंगुल में फंसाया गया। इन दिनों केकड़ी ब्लैकमेल कांड में युवकों को उनके खिलाफ दुराचार का मुकदमा दर्ज करवाने की धमकियां देकर ब्लैकमेल किया जा रहा है।

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