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बाड़मेर मंे 43 हजार ऊंटांे को बचाने की पहल
-बाड़मेर जिले मंे ऊंटों के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन ने पशुपालकांे को प्रोत्साहित करने की शुरूआत की है। मौजूदा समय मंे बाड़मेर जिले मंे 43 हजार 172 ऊंट है। सीमा सुरक्षा बल के जवानांे के साथ सरहद पर अग्रिम रक्षा पंक्ति मंे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ऊंट बाड़मेर की कला एवं संस्कृति के अभिन्न अंग रहे है। ग्रामीण इलाकांे मंे आज भी वार-त्यौहार के साथ विवाह सरीखे शुभ कार्याें मंे इनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है।

बाड़मेर, 19 मार्च। ऊंटों की लगातार घटती संख्या को रोकने एवं पशुपालन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए बाड़मेर जिला प्रशासन एवं पशुपालन विभाग ने अनूठी पहल की है। इसके तहत जागरूकता शिविरांे का आयोजन कर एक ही स्थान पर पशुपालकांे को मिलने वाली सुविधाआंे की जानकारी देने के साथ उष्ट्र विकास योजना मंे पंजीकृत किया जा रहा है। इसमंे ऊंटनी के प्रसव होने पर तीन चरणांे मंे दस हजार रूपए की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। जागरूकता शिविर मंे पहुंचने वाले ऊंटों को समुचित चिकित्सकीय सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही है। इसके तहत शनिवार को डंडाली ग्राम पंचायत मुख्यालय पर पशुपालक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।

बाड़मेर जिले मंे पशुपालक अपने मवेशियांे को लेकर अक्सर विचरण करते रहते है। विशेषकर ऊंटों देवासी समुदाय के लोग तीन-चार दिन तो कई बार 15 दिन से एक माह की अवधि तक के लिए आसपास के गांवांे मंे चले जाते है। कई बार इनको सरकारी योजनाआंे की जानकारी नहीं मिल पाती तो कई बार व्यस्तता के चलते संबंधित पशु चिकित्सालयांे मंे नहीं पहुंच पाते। इन परिस्थितियांे को समझते हुए जिला कलक्टर सुधीर शर्मा, सिवाना विधायक हमीरसिंह भायल एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डा.नारायणसिंह सोंलकी ने एक कार्य योजना बनाते हुए तय किया कि क्यों नहीं, इन पशुपालकांे को एक ही स्थान पर अपने ऊंटों के साथ एकत्रित कर सरकारी सुविधाआंे से लाभांवित किया जाए। इसी कड़ी मंे शनिवार को डंडाली ग्राम पंचायत मुख्यालय पर जागरूकता शिविर का आयोजन कर पशुपालकांे को सरकारी योजनाआंे की जानकारी देने के साथ ऊंटों को समुचित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई गई। जिला कलक्टर सुधीर शर्मा के मुताबिक तिलवाड़ा मेले मंे भी पशुपालकांे को मिलने वाली सुविधाआंे की जानकारी देने के साथ उष्ट्र विकास योजना, भामाशाह पशु बीमा योजना से लाभांवित करवाने का प्रयास किया जाएगा। उनके मुताबिक राज्य सरकार ने ऊंट को राज्य पशु घोषित करते हुए उष्ट्र विकास योजना प्रारंभ की थी। बाड़मेर मंे मौजूदा समय मंे 43 हजार ऊंट है। इनके संरक्षण के लिए वृहद स्तर पर प्रयास किए जा रहे है। पशुपालकांे को मिलने वाली सुविधाआंे से रूबरू करवाने के साथ उष्ट्र विकास योजना मंे पंजीकृत किया जा रहा है। ताकि पशुपालक विशेषकर ऊंट पालन के लिए प्रोत्साहित हो। इस योजना मंे तीन चरणांे मंे पंजीकृत ऊंटनी के प्रसव होने पर 10 हजार रूपए देने का प्रावधान है। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डा.नारायणसिंह सोलंकी के मुताबिक अब तक उष्ट्र विकास योजना मंे 440 ऊंटांे का पंजीकरण कराया गया है।

क्या है उष्ट्र विकास योजनाः जिले के सभी मूल निवासी ऊंट पालक चाहे वे किसी भी वर्ग से संबंधित हो जिले में पाई जाने वाली सभी उष्ट्र वंशीय नस्लों के लिए सहायता देय होगी। इसके तहत ऊंट पालकों को अपना पंजीकरण नजदीकी पशु चिकित्सालय में करवाना होगा। पंजीकृत सभी उष्ट्र वंशीय पशुओं को औषधियां, खनिज लवण, कृमिनाशक दवा विभागीय पशुधन की ओर से निशुल्क उपलब्ध करवाई जाएंगी तथा पंजीकृत ऊंटनी के ब्याने पर उत्पन्न नर या मादा बच्चे को एक माह की उम्र पर तीन हजार रुपए, 9 माह की उम्र पर तीन हजार रुपए तथा 18 माह की उम्र पूर्ण करने पर चार हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। पंजीकृत सभी उष्ट्र वंशीय पशुओं का भामाशाह पशु बीमा योजना अंतर्गत बीमा कराया जाना आवश्यक होगा।

उष्ट्र विकास योजना मंे कैसे होता है पंजीकरणः उष्ट्र विकास योजना के तहत ऊंट पालक को ऊंटनी का नजदीकी पशु चिकित्सालय में पंजीकरण करवाना होता है। साथ ही उसे अपनी बैंक डिटेल भी देनी होगी। किसान अपने नए नवेले टोडियो की ठीक से देखभाल कर सके और ऊंटनी का जापा पूरा करवा सके। इसके लिए ये रकम बेहद महत्वपूर्ण हैं। साथ ही ऊंट के बच्चे के बड़ा होते ही बेचने वाली प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी।

80 फीसदी ऊंट राजस्थान मंेः करीब 25 साल में देश की ऊंटों की संख्या घटकर महज 40 फीसदी रह गई है। पूरे देश के लगभग 80 फीसदी से ज्यादा ऊंट राजस्थान में पाए जाते हैं। साल 2012 की ऊंट गणना के मुताबिक 4 लाख 274 मंे से 3 लाख 25 हजार 713 ऊंट राजस्थान में पाए जाते हैं।

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