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24 घंटे में एक ही पैसेंजर ट्रेन चलने वाला 119 किमी का बाड़मेर-मुनाबाव ा रेल मार्ग बना ग्रीन कॉरिडोर, ट्रेन के सभी कोच में बायो टॉयलेट लगा बनाए जा रहे ऐसे कॉरिडोर


बाड़मेर। रेलवे ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगा रहा है ताकि स्टेशनों पर प्लेटफार्म की लाइन और दो स्टेशनों के बीच लाइन साफ सुथरी रहे। जिन रेलमार्ग पर पूर्णत बायो टॉयलेट लगी ट्रेनें चल रही हैं, उन्हें रेलवे “ग्रीन कॉरिडोर’ नाम दे रहा है। देश में अभी ऐसे तीन रेल मार्ग हैं। रेलवे ने जोधपुर मंडल के दो रेल मार्ग को भी ग्रीन कॉरिडोर घोषित कर दिया है। इन दोनों रेल मार्ग पर पूरे दिन में एक-एक ट्रेन ही संचालित होती है। दरअसल, भारतीय रेल के प्रत्येक जोन में कम से कम एक रेलमार्ग को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के रूप में विकसित किये जाने का प्रस्ताव है। इन कॉरिडोर में चलने वाली किसी भी ट्रेन से टॉयलेट की गंदगी पटरी पर नहीं आएगी, क्योंकि उस ट्रेन के प्रत्येक कोच में बायो टॉयलेट लगा हुआ होगा। अब उत्तर-पश्चिम रेलवे जोन ने जोधपुर मंडल के बाड़मेर-मुनाबाव तथा पीपाड़ रोड-बिलाड़ा रेलमार्ग को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के रूप में विकसित किया है। रेलवे का कहना है कि ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के अन्तर्गत इन दोनों रेलमार्ग बाड़मेर-मुनाबाव (119 किलोमीटर), पीपाड़ रोड-बिलाड़ा (41 किलोमीटर) पर संचालित सभी ट्रेनों में बायो टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दोनों रेल मार्ग की पटरी पर मानव अपशिष्ट नहीं गिरेगा। रेलवे प्रवक्ता तरुण जैन का कहना है कि इन दोनों रेल मार्ग पर चलने वाली ट्रेन उत्तर-पश्चिम रेलवे जोन की हैं इसलिए इनमें बायो टॉयलेट लगने से इन्हें ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। जोन के अन्य रेल मार्ग पर ज्यादातर ट्रेनें दूसरे जोन की होती हैं। उनमें भी बायो टॉयलेट लगने के बाद जोन के अन्य रेल मार्गों को भी ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना के तहत भारतीय रेलवे में दक्षिण रेलवे के रामेश्वरम्-मन्नामदुरैई (14 ट्रेन रोज), पश्चिम रेलवे के ओखा-कानालास (11 ट्रेन रोज) तथा पोरबंदर-वानसजालिया (4 ट्रेन रोज) रेलमार्ग पहले से ग्रीन कॉरिडोर के रूप में घोषित हैं। ये दोनों रेल मार्ग देश के चौथे एवं पांचवें ‘ग्रीन कॉरिडोर’ घोषित किए गए हैं।

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