गुरुवार, 5 जनवरी 2017

चैहटन पांडवो की तपोभूमि में हुआ आचार्यश्री का भव्य नगर प्रवेश। प्रवेश शोभायात्रा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।



चैहटन पांडवो की तपोभूमि में हुआ आचार्यश्री का भव्य नगर प्रवेश।

प्रवेश शोभायात्रा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।

जैन एवं जैनतर समुदाय ने किया आचार्यश्री का अभिनन्दन।





चैहटन, 5 जनवरी। गुरूजी म्हारो अन्तर्नाद हमने आपो आशीर्वाद, छतीसगढ़ के नन्दन कोटि-कोटि वन्दन, पीयूषसागरसूरिजी आये है नई रोशनी लाये है के जयघोष के साथ आचार्य पदारोहण के पश्चात् 18 वर्ष बाद प्रथम बार पांडवों की तपोभूमि चैहटन नगर में आये आचार्य जिनपीयूषसागर सूरीश्वर म.सा. को जैन एवं जैनतर समुदाय ने अपने कंघों पर बिठाकर नगर प्रवेश करवाया। नगर प्रवेश को लेकर नगरवासियों में अपने गुरू के प्रति जबरदस्त उत्साह का माहौल नजर आ रहा था। नगर का दृश्य अद्भूत नजर आ रहा था। सम्पूर्ण नगर में तोरणद्वार, र्होडिंग, बैनरों से सजा हुआ नजर आ रहा था।

इन मार्गो से गुजरी प्रवेश शोभायात्रा- जैन श्रीसंघ चैहटन के अध्यक्ष हीरालाल धारीवाल ने बताया कि खरतरगच्छाचार्य जिनपीयूषसागरसूरीश्वर म.सा. आदि ठाणा 5 का चैहटन नगर प्रवेश गुरूवार को प्रातः 9 बजे विरात्रा चैराहा से सामैया के साथ प्रारम्भ हुआ। आचार्य श्री के प्रवेश की शोभायात्रा केलनोर चैराहा से सामैया के साथ प्रारम्भ होकर मुख्य बाजार, गायत्री चैक, जगदम्बा चैक, पुलिस थाना, पिपली चैक, जैन दादावाड़ी, सुन्दर नगर होते हुए शांतिनाथ जैन मन्दिर पहुंची। प्रवेश शोभायात्रा में अश्व पर सवार जैन घ्वज सवार, पदमावती बैंड, गुरू भगवंत, सिर पर मंगल कलश धारण किए विचक्षण महिला मंडल, कुशल हेम बालिका मंडल, कुशल हेम महिला मंडल, महिला मंडल, जैन ध्वज लिए वीतराग संस्कार वाटिका के बच्चे, जिनशासन विहार सेवा ग्रुप, जिनआनंद मंडल, मित्र मंडल, कुशल हेम युवा परिषद सहित जैन एवं जैनतर समाज के पुरूष वर्ग, महिला वर्ग प्रवेश शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे। बैंड की धुन एवं ढ़ोल की थाप पर गुरूभक्त जगह-जगह पर झूम रहे थे। आचार्य श्री को जहां-जहां से शोभायात्रा गुजरी वहां-वहां आचार्य भगवंत को गंहूली से बधाया गया। शोभायात्रा शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए स्थानीय शांतिनाथ जिनालय पहुंचकर धर्म सभा में परिवर्तित हो गई।

18 वर्ष बाद हुआ पांडवों की तपोभूमि में आगमन- धारीवाल ने बताया कि आचार्य भगवंत ने आज से 18 वर्ष पूर्व चैहटन नगर में अपने गुरू खरतरगच्छाधिपति जिनमहोदयसागरसूरीश्वर म.सा. के साथ चातुर्मास किया था तथा उस दरम्यान महामंगलकारी उपधान तप की आराधना सम्पन्न हुई थी। आज 18 वर्षों के पश्चात् उनके नगर आगमन पर कई भक्तों ने उनका अभिनन्दन करते हुए गुरू के प्रति श्रद्धाभाव प्रकट किए।

ये रहे कार्यक्रम के अतिथि- प्रवेश शोभायात्रा में जैन श्रीसंघ बाड़मेर अध्यक्ष एडवोकेट सम्पतराज जैन, पूर्व नाकोड़ा ट्रस्ट अध्यक्ष जेठमल जैन, शिक्षाविद् बंशीधर तातेड़, जिला परिषद सदस्य एडवोकेट रूपसिंह राठौड़, पूर्व सरपंच हिन्दूसिंह राठौड़ चैहटन, उप सरपंच मोहनलाल सोनी ने कार्यक्रम में आतिथ्य प्रदान किया।

इन्होनें किया गुरू का अनुमोदन- सभा को संबोधित करते हुए शिक्षाविद् बंशीधर तातेड़ ने कहा कि गुणगान उस व्यक्ति का किया जाता है जिनका कद हमारे से बहुत ऊंचा होता है, अगर उस व्यक्तिका कद हमारे से नीचा होता है तो उसका कभी गुणगान नहीं किया जाता है। अरिहंतों ओर सिद्ध को हमने देखा नहीं लेकिन तीर्थंकरों की अनुपस्थिति में जो चतुर्विध संघ का संचालन करते है वो आचार्य होते है। पंच परमेष्ठि में जिनका तीसरा स्थान है।

मुमुक्षु लोकेश गोलच्छा ने सोच बदलने की बात कही। मुमुक्षु रजत चैपड़ा ने पांड़वों की तपोभूमि की व्याख्या करते हुए कहा कि जिस तरह से पांचों पांडवों में युधिष्ठर के पास सत्य, अर्जुन के पास समर्पण, भीम के पास सत्व, नुकुल के पास सद्भाव एवं सहदेव के पास सहयोग गुण था वे सभी गुण चैहटन की धर्मप्रेमी जनता में नजर आता है। एडवोकेट सम्पतराज बोथरा, एडवोकेट रूपसिंह राठौड़, सोहनलाल डोसी ने डोसी ने अपने उद्गार व्यक्त किए। रवीना सेठिया ने आई मंगल घड़िया आज म्हारे आंगणिये.... महिला मंडल ने वंदन करके करलो स्वागत ओर करो सत्कार, जुगलकिशोर धारीवाल ने माता जमना के प्यारे पिता नेमीचंद के दुलारे गीतिका के माध्यम से आचार्यश्री का स्वागत अभिनन्दन किया। इस अवसर पर मुमुक्षु लोकेश गोलेच्छा एवं रजत चैपड़ा का अभिनन्दन चैहटन नगर के मुमुक्षु रजत सेठिया एवं मुमुक्षु शुभम सिंघवी के द्वारा किया गया। जिनआनंद मंडल द्वारा साधर्मिक वात्सल्य का लाभ लिया गया।

संध्या करवाती है संसार की क्षणभंगुरता का बोध- आचार्य जिनपीयूषसागरूसूरीश्वर म.सा. ने 18 वर्ष पूर्व किए चातुर्मास की यादों को ताजा करते हुए कहा कि संध्या के समय जब दृष्टि आकाश की तरफ जाती है तब आकाश में बने रंग-बिरंगे चित्रों को देखकर मन प्रसन्नता से भर जाता है, ह्दय आनंदित हो जाता है परंतु अचानक एक हवा का झोंका आता है और उन मनभावन दृश्य को विलीन कर देता है, मन के प्रसन्नता के भाव क्षीण हो जाते है। ह्दय की विचारधारा रूक जाती है। क्षणभंगुर जीवन की नश्वरता आंखों समक्ष उभरने लगती है। जब तक स्वार्थ है तब तक ये जीवन प्रिय लगता है। हास-परिहास, आमोद-प्रमोद विविध प्रकार के भौतिक साधनों से ये जीवन हमारा चलता रहता है, अचानक विपति का झोंका आता है भौतिक रंगो में रंगा हमारा जीवन क्षणभर में मिट जाता है। जन्म मृत्यु की बात छोड़कर दुः,ख-सुख की हम बात करे तो विविध प्रकार के भौतिक साधनों से हमारे जीवन में दुःखों की बाढ़ है। अचानक दुःख का झोंका आया कि सारा सुख, सारा उत्साह, सारी उमंग निराशा में बदल जाती है। आचार्य प्रवर ने कहा कि महापुरूषों के सम्पर्क से भले महापुरूष न बन सके लेकिन उनके समीप जाने से वैराग्य के, संयम के भाव सुवासित अवश्य होगें। सद्गुरूओं की संगति करने से संतो के साथ ज्ञान चर्चा करने से ही इस संसारी भूल भूलैया से निकलने का मार्ग मिल सकता है। आचार्य श्री ने जिनआनंद मंडल को सामुहिक वर्षीतप प्रारंभ करने की प्ररेणा दी।

संसार मलीन, पराधीन व क्षणीक- प्रखर प्रवचनकार मुनि सम्यकरत्नसागर म.सा. ने कहा कि संसार के तीन कलंक है पहला संसार मलीन है, दूसरा संसार पराधीन है और तीसरा संसार क्षणीक है। संसार का सुख मलीन है। जिसे धन का सुख है उसे लोभ का दुःख है। महिला में सुख दिखता है तो वासना का दुःख है। संसार के समस्त सुख पराधीन है। क्षणीक है। नाशवान शरीर से, मन से स्थायी सुख की प्राप्ति संभव नहीं है। स्वाधीन सुख की प्राप्ति के लिए प्रयासरत हो जाये तो हम मुक्ति के लिए अग्रसर हो सकते है।

इस अवसर आर्य गुण गुरू कृपा तीर्थ रामजी का गोल ट्रस्ट मंडल आचार्य श्री के चरणों में पहुंचकर प्रतिष्ठा महोत्सव की आमंत्रण पत्रिका भेंट कर प्रतिष्ठा महोत्सव में पधारने का आमंत्रण आचार्य श्री एवं सकल संघ को दिया।

जैन श्रीसंघ अध्यक्ष हीरालाल धारीवाल ने शोभायात्रा में चार चांद लगाने वाले समस्त मंडलों, आंगतुकों का आभार व्यक्त किया एवं कहा कि नगर के लिए हर्ष व खुशी की बात है कि आज दिन तक नगर में जितने भी प्रवेश हुए उनमें से आज का आचार्य श्री का नगर प्रवेश ऐतिहासिक रहा। धारीवाले बताया कि शुक्रवार से आचार्य भगवंत के प्रतिदिन प्रातः 9.30 से 10.30 बजे तक नियमित प्रवचन रहेगें। शुक्रवार को ‘अंधों की आंखे खोली’ विषय पर प्रवचन होगा। कार्यक्रम का सफल संचालन गौतम भंसाली ने किया।

प्रवेश शोभायात्रा में बाड़मेर, सूरत, जोधपुर, बालोतरा, धोरीमन्ना, छतीसगढ़ सहित देश के विभिन्न अचंलो से गुरूभक्त शिरकत की।

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