जोधपुर तन सिंह जयंती भव्य रूप से मनाई 

तन सिंह जी के आदर्शो को आत्मसात करे 

पूज्य तन सिंह जी की 93 वीं जयन्ती बी जे एस ग्राउंड जोधपुर में 25 जनवरी 2017 को भव्य समारोह के रूप में सम्पन्न हुई। संघ प्रमुख भगवान सिंह जी के सानिध्य में हुए इस कार्यक्रम में लगभग अड़तीस - चालीस हजार राजपूत समाज के सरदारों व नारी शक्ति ने बड़े ही उत्साह के साथ भाग लेकर पूज्य श्री तन सिंह जी को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

इस पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में तनसिंह के जीवन और कार्यप्रणाली सहित बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही थी। लेकिन युवक संघ के प्रमुख रोलसाहबसर के उद्बोधन पर अपनी नाराजगी जाहिर स्वरूप मुख्यमंत्री अपने स्थान से उठकर कार्यक्रम का संचालनकर्ता के पास पहुंच गई। यहां उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की बात सर्वमान्य है। 


तन सिंह जयंती समारोह आज, शामिल हुईं राजस्थान की मुख्यमंत्री
दोपहर में आरम्भ हुए कार्यक्रम में प्रेम सिंह जी रणधा ने सभी का स्वागत करते हुए संघ व जयन्ती कार्यक्रम की भूमिका को बड़े ही सहज भाव से रखा।गजेंद्र सिंह जी महरौली ने अपनी ओजस्वी वाणी में पूज्य तन सिंह जी का जीवन परिचय प्रस्तुत किया। मानवेंद्र सिंह जी जसोल ने अपने उद्बोधन में स्व. चतुर सिंह जी हत्या काण्ड के मुद्दे को आक्रोशित स्वर में उठाते हुए अगली जयन्ती से पहले दोषियों को सजा दिलाने के संकल्प को पुरजोर समाज के समक्ष रखा। जोधपुर महाराजा साहेब गज सिंह जी ने तनसिंह जी के संस्मरण सुनाते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन ही राजपूत समाज के लिए था, उनकी प्रेरणा से आज भी युवा आगे बढ़ रहे है। वसुंधरा राजे ने पूज्य तन सिंह जी के शब्दों में कहा जो लोग नफरत के प्याले पीकर उन्हीं प्यालों में अमृत की मनुहार करते है, वे ही असल में बड़े होते है। समाज के आगे मुख्यमंत्री कुछ नहीं। राजपूत जाति छत्तीस कौम की अगुआ रही है। तन सिंह जी के इस जयन्ती कार्यक्रम में भाग लेना, मैं अपना परम सौभाग्य समझती हूँ। संघ प्रमुख जी ने कहा कि, वसुंधरा राजे का इस कार्यक्रम में भाग लेना कुछ लोगों को ठीक नहीं लग रहा था। वो सही भी था क्योंकि टिकट वितरण व आरक्षण के मुद्दे पर राजपूत समाज आक्रोशित है। तीन वर्ष बीत गए यह हमारी उपेक्षा क्यों कर रही है? मेरी उनसे पूर्व में जब बात हुई तो मैंने ये मुद्दे रखे। मैं खुले मंच से समाज की बात रखता हूँ। यह अलगाव मात्र किसी समस्या का समाधान नहीं है। मैं समाज की भावना को हर स्तर तक पहुंचाने की पुरजोर कोशिश करूँगा।

पूज्य तन सिंह जी के आदर्शों को जीवन में ढालने का उन्होंने आव्हान करते हुए कहा कि जागो और जगाओ। संगठन में बड़ी शक्ति है। हम नेक बनकर एक बन जाएं। हमारी समस्याओं का समाधान हमें ही करना होगा। नारायण सिंह जी माणकलाव ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस बीच मुख्यमंत्री ने अपनी सीट से बोलते हुए नफरत को पी लेने का आग्रह किया। कार्यक्रम में संत प्रताप पुरी जी तारातरा, समता राम जी पुष्कर, राजेंद्र सिंह जी राठौड़, गजेंद्र सिंह खींवसर, सुरेंद्र गोयल, नारायण पंचारिया, पी पी चौधरी, जसंवत जी विश्नोई, महावीर सिंह जी सरवड़ी, हनुमान सिंह जी खांगटा, महेंद्र सिंह जी राठौड़, तन सिंह जी चौहान, बाबू सिंह जी नाथडाऊ, शैतान सिंह जी राठौड़, जालम सिंह जी सतो, रामेश्वर डूडी, शंभू सिंह जी खेतासर, धनश्याम जी ओझा आदि गणमान्य भी उपस्थित थे।

जयन्ती कार्यक्रम के बाद सभी लोग कार्यक्रम की सफलता की चर्चा करते हुए बड़े ही उत्साहित लग रहे थे।

माँ भगवती हम सबको सद्बुद्धि दे व हम सभी समाज के सच्चे सेवक बन उसकी पीड़ा को हर सकें।

प्रस्तुति - रतन सिंह बडोड़ा गाँव

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