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राजस्थान का इतिहास एवं साहित्य अब ई-बुक्स एवं गूगल एप पर

वैबसाइट एवं गूगल एप की हुई लांचिंग, पर्यटन के मिलेगा इससे बढ़ावा


नई दिल्ली, 20 दिसम्बर, 2016 । शौर्य एवं स्वामिभक्ति की गाथाओं से समृद्ध राजस्थान का इतिहास एवं साहित्य अब ई-बुक्स एवं गूगल एप पर भी उपलब्ध होगा जिसका लाभ विश्व भर के अनेक देशों के पाठक उठा सकेंगे। इसमें राजस्थान के पर्यटन को देश-विदेश में बढ़ावा मिलेगा तथा राजस्थान से संबंधित प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए सस्ती पुस्तकें मिल सकेगी।

इस वैबवाइट एवं गूगल एप से दुनिया के किसी भी देश में निवास करने वाले राजस्थानियों एवं भारतीयों के साथ-साथ विदेशी पाठकों को भी राजस्थान के शौर्य एवं स्वामिभक्ति की गाथाओं से समृद्ध इतिहास एवं साहित्य उपलब्ध हो सकेगा। शुभदा प्रकाशन जोधपुर ने इसके लिये पूर्णतः समर्पित वैबसाइट एवं गूगल एप तैयार करवाया है जिसकी लांचिंग राजस्थान, जोधपुर के संभागीय आयुक्त श्री रतन लाहौटी द्वारा की गई।

इस अवसर पर उन्होने कहा कि ई-बुक्स से जहां एक और कागज और समय की बचत होती है वही बहुत कम राशि में अच्छी पुस्तकें पढ़ने को मिलती है। इसके लिए पाठक को मोटी-मोटी पुस्तके अपने साथ ढोकर ले जाने की अवश्यकता नही होती। छोटे से मोबाईल और टेबलेट में हजारों पुस्तकों की लाइब्रेरी हर समय पाठक की जेब में उपलब्ध रहती है।

सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के पूर्व उपनिदेशक डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने बताया कि वैबसाइट ूूूण्तंरंेजींदीपेजवतलण्बवउ तथा गूगल एप त्ंरंेजींदीपेजवतल पर राजस्थान के योद्धा, महापुरुष, दुर्ग, नगर एवं रियासती इतिहास के साथ-साथ कला, साहित्य, संस्कृति, लोक-परम्परा आदि पर भी बहुत कम मूल्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये ई-बुक्स उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही भारत के इतिहास पर भी पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी। पाठक इस वैबसाइट एवं एप से ई-बुक्स के साथ-साथ मुद्रित पुस्तकों का भी लाभ उठा सकेंगे।

इस वैबसाइट एवं एप को जोधपुर की ही संस्था डब्लूएसक्यूब टैक ने तैयार किया है। डब्लूएस क्यूब के डायरेक्टर कुशाग्र भाटिया ने बताया कि त्ंरंेजींदीपेजवतल वैबसाइट को किसी भी कम्प्यूटर से एक्सेस किया जा सकेगा जबकि ई-बुक्स पढ़ने के लिये किसी भी एण्ड्रॉयड डिवाइस पर गूगल प्ले स्टोर से तंरंेजींदीपेजवतल फ्री एप डाउनलोड करना होगा। फिलहाल ई-बुक्स की खरीद पर 50 से 90 प्रतिशत तक रियायत रहेगी जबकि कुछ ई-बुक्स फ्री उपलब्ध कराई गई हैं। साहित्यकारों, लेखकों एवं मीडिया प्रतिनिधियों को 1000 रुपये मूल्य तक की ई-बुक्स निःशुल्क उपलब्ध कराई जायेंगी। इसके लिये उन्हें उसहनचजंचतव/हउंपसण्बवउ पर अपना नाम, ईमेल आईडी, सैलफोन नम्बर, मीडिया संस्थान का नाम अथवा स्वयं द्वारा लिखित पुस्तकों की जानकारी देनी होगी। इस रजिस्ट्रेशन के बाद ई-बुक्स के लिये निशुल्क कूपन जारी किया जायेगा। यह योजना 31 जनवरी तक उपलब्ध रहेगी।

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