सोमवार, 5 जनवरी 2015

बाड़मेर हर दूसरे घंटे एक अपराध,बाड़मेर अपराध शहर बना

बाड़मेर हर दूसरे घंटे एक अपराध,बाड़मेर अपराध शहर बना 


बाड़मेर। अपेक्षाकृत शांत व सहज समझे जाने वाले बाड़मेर जिले में अपराध का ग्राफ रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रहा है। वर्ष 2014 में थानों में दर्ज अपराध का आंकड़ा पांच हजार को पार कर गया।

यह पहली बार है कि दर्ज अपराध पांच हजार के अंक से ऊपर चले गए हैं। जिले में प्रतिदिन कम से कम चौदह मामले दर्ज हुए हैं। अपराध के ग्राफ में प्रतिवर्ष बढ़ोतरी होती ही जा रही है। इस बढ़े हुए आंकड़े में चिंता की बात यह है कि गंभीर प्रकृति के अपराधों यथा हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, लूट, अपहरण, दुष्कर्म, महिला अत्याचार के मामलों में ज्यादा वृद्धि हुई है।

496 मामले ज्यादा
वर्ष 2014 में कुल 5021 मामले दर्ज हुए, जो वर्ष 2013 में दर्ज 4525 मामलों के मुकाबले 496 ज्यादा हैं। वर्ष 2012 में दर्ज मामलों की संख्या 4107 ही थी। यदि महिला अत्याचार से जुड़े मामलों की ही बात करें तो दो वर्ष के अंतराल में आंकड़ा बढ़कर लगभग दुगुना हो गया है। वर्ष 2012 में 384, 2013 में 584 मामले दर्ज हुए थे, जो 2014 में बढ़कर 726 तक पहुंच गए।

हत्या व हत्या का प्रयास
हत्या व हत्या का प्रयास संगीन वारदात की श्रेणी में आता है। वर्ष 2012 में हत्या के 29 मामले दर्ज हुए। 2013 में 31 व 2014 में 38 हो गए। इस तरह हत्या के सात मामले ज्यादा हुए। हत्या के प्रयास से जुड़े मामलों में वर्ष 2013 में गिरावट आई थी, लेकिन 2014 में इसमें बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2012 में 30, 2013 में 29 व 2014 में 34 मामले दर्ज हुए।

अपहरण में शत फीसदी इजाफा
व्यपहरण व अपहरण के मामलों में वर्ष भर में सौ फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2012 में 35 मामले दर्ज हुए थे, जो 2013 में घटकर 27 हो गए। लेकिन वर्ष 2014 में रिकॉर्ड 57 मामले दर्ज हुए। अपहरण का यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। अपहरण के अधिकांश मामले सम्पत्ति संबंधी अपराध व औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।

लूट व डकैती से सनसनी
लूट व डकैती की वारदातें सनसनी फैलाने वाली है। बीते तीन वर्षो में डकैती की चार वारदातें हुई है, जिसमें तीन वारदातें वर्ष 2014 में हुई। इसमें शहर के निकट मोटर्स शोरूम में डाका डालकर 74 लाख रूपए नकद ले जाने का सनसनीखेज मामला शामिल है। जहां तक लूट की वारदातों का सवाल है तो वर्ष 2012 में केवल तीन वारदातें दर्ज हुई थी, जो 2014 में 19 तक पहुंच गई। 2013 में लूट के 11 मामले दर्ज हुए थे।

हर चौथे दिन लुटी अस्मत
वर्ष 2014 में जिले में दुराचारियों ने हर चौथे दिन एक महिला की आबरू से खिलवाड़ किया। इसमें दुष्कर्म के 93 मामले दर्ज हुए। मसलन 94 घण्टे में एक दुष्कर्म हुआ। वर्ष 2012 में दुष्कर्म के 21 मामले दर्ज हुए थे, जो वर्ष 2013 में बढ़कर 55 तक पहुंच गए। दिल्ली के दामिनी प्रकरण के बाद सख्त कानून बनने के बावजूद दुष्कर्म के मामलों की संख्या बढ़ती गई, जो बीते वर्ष में 93 हो गई।

चोरियों पर थोड़ी नकेल
आंकड़ों के दृष्टिकोण से देखें तो वर्ष 2014 में चोरी की वारदात के मामलों में पुलिस कमी लाने में सफल रही। वर्ष 2012 में चोरी के 387, 2013 में 389 मामले दर्ज हुए थे, लेकिन वर्ष 2014 में यह आंकड़ा गिरकर 352 पर आ गया। वर्ष भर में पुलिस सर्वाधिक सुकून की स्थिति यहीं पर रही।

वर्ष भर एक्शन में रही पुलिस
अपराधों की जड़ पर चोट करने के लिए पुलिस वर्ष भर एक्शन में रही। आबकारी अधिनियम, जुआ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम, स्वापक औषधि एवं नशीले पदार्थ अधिनियम, एक्सप्लोसिव एक्ट, आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य एक्ट के तहत पुलिस ने वर्ष 2014 में 719 मामले दर्ज किए, जो वर्ष 2013 की तुलना में अधिक है। वर्ष 2012 में विभिन्न एक्ट के तहत 692 व 2013 में 675 मामले दर्ज हुए थे। -  

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