रविवार, 19 जून 2011

श्रद्धापूर्वक मनाई आचार्य तुलसी की पुण्यतिथि


श्रावक-श्राविकाओं ने लिया तुलसी के बताए मार्गों पर चलने का संकल्प, सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियोंं के माध्यम से दी तुलसी को श्रद्धांजलि

श्रद्धापूर्वक मनाई आचार्य तुलसी की पुण्यतिथि

बालोतरा शहर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को आचार्य तुलसी की 15वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। साध्वी चांद कुमारी, गुलाब कुमारी व तिलकश्री के सानिध्य में आचार्य की पुण्यतिथि के कार्यक्रम का प्रारंभ त्रिपदी वंदना व तुलसी अष्टक के संगान से हुआ। कन्या मंडल, महिला मंडल एवं युवक परिषद की संगीत मंडलियों ने सुमधुर भजनों से गुरू चरणों में श्रद्धांजलि दी।साध्वी राकेश कुमारी एंड कंपनी की ओर से दी गई प्यारो लागे तुलसी नाम की प्रस्तुति ने उपस्थित जन समुदाय को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगरपालिका अध्यक्ष महेश बी चौहान ने कहा कि भारत भूमि महापुरूषों की भूमि है।उन्होंने कहा कि आचार्य तुलसी ने आध्यात्म के पवित्र संस्कार विश्व क्षितिज तक पहुंचाए।उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कारों से परिवार, समाज और राष्ट्र उन्नत व शक्तिशाली बनते हैं।पूर्व नगरपालिका चेयरमैन प्रभा सिंघवी ने कहा कि आचार्य तुलसी युग पुरूष के रूप में सदैव विद्यमान रहेंगे।साध्वी तिलकश्री ने कहा कि प्रभावशाली व्यक्तित्व, नेतृत्व और वक्तृृत्व वाला व्यक्ति ही महान बन सकता है।तेरापंथ सभा अध्यक्ष घेवरचंद मेहता, दिलीप छाजेड़, पुष्पा बाईओस्तवाल, ओम बांठिया, गणवंती बाई, मांगीलाल भंसाली, साध्वी विवेक श्री, साध्वी हेमरेखा व साध्वी संकल्पप्रभा ने कविता, मुक्तक, गीत व वक्तव्यों के माध्यम से अपनी भावना व्यक्त की।कार्यक्रम के अंत में साध्वी चांद कुमारी ने कहा कि आचार्य का हर निर्णय सार्थकता के सोपान पर पहुंचकर जन-जन के लिए वरदान बन गया।इसी तरह निकटवर्ती कनाना स्थित तेरापंथ भवन में मुनि सुव्रत कुमार व मुनि मदन कुमार के सानिध्य में आचार्य तुलसी को उनकी १५वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि दी गई।

इस मौके पर मुनि सुव्रत कुमार ने कहा कि आचार्य तुलसी नैतिक चेतना के प्रहरी थे।उन्होंने अणुव्रत अभियान के माध्यम से जनजागरण का महान कार्य किया।मुनि मदन कुमार ने कहा कि जीवन की सफलता की कसौटी अप्रमाद है।आचार्य विश्व गुरू और कालजयी व्यक्तित्व के धनी थे।उन्होंने कहा कि आचार्यमें कोमलता और कठोरता को अद्भुत समन्वय था।कार्यक्रम में मुनि कोमल कुमार, मुनि शांतिप्रिय, घीसूलाल कोठारी, भैरूलाल डागा, प्रभा सिंघवी, प्रकाश श्रीश्रीमाल, तेजप्रकाश वैष्णव, मुमुक्षु परिमल, राजू, तृप्ति, रमेश कुमार, सुमेरमल बाफना व कन्या मंडल ने अपने उद्गार व्यक्त किए।

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